संयुक्त राज्य ने इरान पर तीसरा हवाई हमला किया, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ का फिर से बंद होना और खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी ठिकानों पर इरानी मिसाइल व ड्रोन हमले हुए। भारत ने इस तनावपूर्ण स्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक कार्रवाई की।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- US ने इरान पर तीसरा हवाई हमला किया, स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ को बंद करने की इरानी घोषणा के बाद।
- इरान ने खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जवाबी कार्रवाई का इशारा दिया।
- भारत ने घटना में फँसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर तुरंत कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी और तनाव कम करने की अपील की।
संयुक्त राज्य ने इरान के खिलाफ तीसरा हवाई हमले का क्रम शुरू किया, इस कार्रवाई के कारण स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ फिर से बंद हो गया। इस जलमार्ग को विश्व के लगभग बीस प्रतिशत तेल और एलएनजी शिपमेंट्स का संचालन माना जाता है, इसलिए इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है।
पृष्ठभूमि और कारण
इंटरनैशनल कंटेनर शिप एम/वी जीएफएस गैलेक्सी पर इरान ने हमला किया, यह आरोप लगाते हुए कि वह बिना अनुमति के स्ट्रेट से होकर गुजर रहा था। इस घटना के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 140 से अधिक इरानी सैन्य लक्ष्यों पर हमला किया, जिससे तीन रातों में 300 से अधिक साइट्स को निशाना बनाया गया। इस दौर में इरान ने भी उत्तर में खाड़ी के विभिन्न देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन प्रहार किया, जिससे क्षेत्र में युद्ध का जोखिम बढ़ गया।
क्षेत्रीय प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इरान ने स्ट्रेट को तब तक बंद रखने का संकल्प किया, जब तक अमेरिकी हस्तक्षेप समाप्त नहीं होता। इस घोषणा के बावजूद, अमेरिकी सेना ने कहा कि वाणिज्यिक जहाज अभी भी इस मार्ग से गुजर रहे हैं। इस संघर्ष ने तेल की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की संभावना को उजागर किया, जिससे तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया
घटना में 11 भारतीय नागरिक शामिल थे; 10 को बचाया गया जबकि एक अभी भी लापता है। भारत ने ओमान में अपने दूतावास के माध्यम से ओमानी अधिकारियों के साथ मिलकर बचाव कार्यों को समन्वित किया और तुरंत तनाव कम करने की माँग की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह “क्षेत्र में शिपिंग पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता” का कारण है और सभी पक्षों से संयम रखने का अनुरोध किया।
आगे की संभावनाएँ
यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद की कोई राह नहीं निकले, तो खाड़ी में और बड़े सैन्य टकराव की संभावना बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र, इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है। इस बीच, ऊर्जा बाजार की अस्थिरता और व्यापार मार्गों की सुरक्षा दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बनकर उभरे हैं।