विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय में 2028‑29 के लिए स्थायी नहीं सीट हेतु भारत का आधिकारिक अभियान आरम्भ किया। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की समान आवाज़ और बहुपक्षीय सुधारों पर बल दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारत ने 2028‑29 अवधि के लिए यूएन सुरक्षा परिषद में गैर‑स्थायी सीट हेतु आधिकारिक अभियान शुरू किया।
- अभियान का मुख्य संदेश ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी और बहुपक्षीयता में सुधार है।
- भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सहित व्यापक सुधार की मांग की है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 14 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 2028‑29 अवधि के लिए यूएन सुरक्षा परिषद में गैर‑स्थायी सीट हेतु भारत का आधिकारिक अभियान शुरू किया। इस अवसर पर कई राजदूत, कूटनीतिक प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय अधिकारी उपस्थित थे। जयशंकर ने कहा कि भारत का लक्ष्य "शांति, सुरक्षा, समावेशी विकास और भरोसेमंद बहुपक्षीयता" के सिद्धांतों पर आधारित एक नया वैश्विक व्यवस्था बनाना है, जिसमें ग्लोबल साउथ की आवाज़ को समान मान्यता मिलेगी।
ग्लोबल साउथ परिप्रेक्ष्य और बहुपक्षीयता
जयशंकर ने बताया कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में सुरक्षा परिषद को आधुनिक चुनौतियों—जैसे यूक्रेन युद्ध, गाज़ा संघर्ष और मध्य‑पूर्व में तनाव—से निपटने के लिए अधिक प्रभावी और समावेशी बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "एक ऐसी दुनिया जहाँ शांति रक्षा आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप हो, जहाँ बहुपक्षीयता वास्तविक समस्याओं का समाधान करे, और जहाँ तकनीकी प्रगति का पूर्ण उपयोग हो, लेकिन दुरुपयोग से बचाव भी हो।" इस दृष्टिकोण में समुद्री सुरक्षा, जलवायु न्याय और आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों को दबाना भी शामिल है।
भविष्य की कूटनीतिक यात्रा
कार्यक्रम के बाद जयशंकर ने यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। वह न्यूयॉर्क से ब्रुसेल्स की ओर यात्रा करेंगे, जहाँ वे तीसरी भारत‑ईयू व्यापार‑प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे और यूरोपीय संघ के साथ रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करेंगे। 2028‑29 की सीट के लिए चुनाव अगले वर्ष जून में निर्धारित है, जहाँ भारत और ताजिकिस्तान एशिया‑प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
सुरक्षा परिषद में भारत का इतिहास और भविष्य की मांग
भारत ने पहले 2021‑22 में सुरक्षा परिषद में भाग लिया था, यह उसके आठवें कार्यकाल था। लगातार वर्ष 1950‑51, 1967‑68, 1972‑73, 1977‑78, 1984‑85, 1991‑92 और 2011‑12 में भी भारत ने इस मंच पर सेवा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इंडोनेशिया में कहा कि विकसित देशों के साथ समान भागीदारी के बिना वैश्विक व्यवस्था नहीं चल सकती। इस संदर्भ में भारत ने स्थायी सदस्यता सहित सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की माँग की है, क्योंकि केवल गैर‑स्थायी सीट का विस्तार मौजूदा शक्ति संरचना को नहीं बदलता।
संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पार्वथानेनी ने कहा कि "सब कुछ सहमत होने तक कुछ भी सहमत नहीं माना जा सकता"— यह दृष्टिकोण सुधार को रोकेगा। जयशंकर के अभियान ने भारत की 2028‑29 की सीट के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा को रेखांकित किया है, साथ ही विश्व स्तर पर अधिक प्रतिनिधित्व और प्रभावी बहुपक्षीयता की आवश्यकता को भी उजागर किया है।