जग्गु भगवनपुरिया, जो पहले लॉरेंस बिश्नोई के सहयोगी थे, अब 44‑पृष्ठीय अमेरिकी फेडरल आरोपपत्र के केंद्र में हैं। यह लेख उनके पंजाब के गाँव से लेकर कैलिफ़ोर्निया, कनाडा और यूके तक फैले नेटवर्क की कहानी को उजागर करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • जग्गु भगवनपुरिया ने जेल से भी अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क चलाया।
  • FBI ने 44 पृष्ठीय आरोपपत्र में 1,000 से अधिक सदस्यों का जिक्र किया।
  • सोशल मीडिया भर्ती और धन शोधन के मुख्य उपकरण बन गया।

जग्गु भगवनपुरिया, 38‑वर्षीय जुगदीप सिंह, गوردासपुर के भगवनपुर गाँव के निवासी, एक समय कबड्डी के आशाजनक खिलाड़ी थे। 2012 में पहली बार नशे के मामलों में गिरफ्तार होने के बाद से उनके खिलाफ 128 से अधिक FIR दर्ज हुईं, जिनमें हत्या, जबरन वसूली और हथियारों के अवैध कब्जे के आरोप शामिल हैं। पिछले दशक में वह पंजाब के कई जेलों में रहे, पर 2025 में नशा नियंत्रण ब्यूरो ने उन्हें असम के सिलचर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया, ताकि उनके पंजाब के सहयोगियों से संपर्क तोड़ सके।

साथी से प्रतिद्वंद्वी तक

भगवनपुरिया का प्रारम्भिक करियर लॉरेंस बिश्नोई के साथ घनिष्ठ सहयोग पर आधारित था। दोनों को मई 2023 में लोकप्रिय पंजाबी रैपर सिधु मूसेवाला की हत्या की साजिश में फँसा हुआ माना गया था। लेकिन 2023 के फरवरी में गोइंदवाल साहिब जेल में दोनों गैंगों के बीच रक्तरंजित टकराव ने उनके रिश्ते को तोड़ दिया। बिश्नोई के सहयोगी गोल्डी बर ने इस घटना पर फेसबुक पर दावा किया, जिससे भगवनपुरिया ने स्वतंत्र रूप से अपना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करने का रास्ता चुना।

वैश्विक विस्तार और अमेरिकी आरोपपत्र

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, भगवनपुरिया ने "भगवनपुरिया ऑर्गनाइज़्ड क्राइम ग्रुप" नामक एक संगठित अपराध समूह बनाया, जिसमें भारत, कनाडा, संयुक्त राज्य, यूके, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में 1,000 से अधिक सदस्य और सहयोगी शामिल हैं। कैलिफ़ोर्निया को मुख्य हब माना गया, जहाँ कोकेन, मेथाम्फेटामाइन और हेरोइन को ट्रांसपोर्ट किया जाता था, फिर उन्हें कनाडा तक पहुँचाया जाता था। FBI ने मई 2024 में पंजाबी प्रवासी समुदाय को वसूली की रिपोर्ट करने के लिए चेतावनी जारी की।

इंस्टाग्राम के माध्यम से भर्ती और धन शोधन

अभियोजन में बताया गया है कि समूह ने आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं, यहाँ तक कि नाबालिगों को भी इंस्टाग्राम के ज़रिये आकर्षित किया। उन्हें त्वरित धन, सामाजिक प्रतिष्ठा और विदेश में काम करने का वादा किया गया। जो वफादार रहे, उन्हें कनाडा, यूएस या यूके में स्थानांतरित कर अंतरराष्ट्रीय संचालन में शामिल किया गया। पंजाब पुलिस ने 2023 में बताया था कि इंस्टाग्राम के माध्यम से तीन अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के सदस्य भर्ती हुए थे, और सोशल मीडिया पर धमकीपूर्ण पोस्ट और गैंग के चित्रों को फैलाकर नई भर्ती को प्रेरित किया गया।

भविष्य की चुनौतियां और कानूनी प्रभाव

जग्गु भगवनपुरिया के मामले से भारत और अमेरिका के बीच आपराधिक सहयोग की नई सीमाएँ उजागर होती हैं। यदि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलतापूर्वक अभियोजित किया गया, तो यह भारतीय जेल प्रणाली में मौजूद कमजोरियों—जैसे डिजिटल संचार की निगरानी की कमी—पर प्रश्न उठाएगा। साथ ही, यह केस भारतीय न्यायालयों को विदेश में मौजूद अपराधी नेटवर्क को नष्ट करने के लिए अधिक सक्रिय सहयोगी समझौतों की ओर धकेल सकता है।