काठमांडू में 25 वर्षीय गनेश नेपाली की आत्मदहना ने बालेन शाह सरकार को तीव्र आलोचना का सामना करवाया है। अब जनसमूह ने बालेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है, जबकि कई युवा दमन और गिरफ़्तारी के शिकार हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गनेश नेपाली की आत्मदहना ने बालेन सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध को प्रज्वलित किया।
- सरकारी विस्थापन नीतियों और पुलिस दमन पर बढ़ती निराशा।
- आगे बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन की संभावना।
काठमांडू में 25 वर्षीय गनेश नेपाली की आत्मदहना ने बालेन शाह के 103‑दिन के कार्यकाल में सरकार की कई नीतियों को लेकर उठी असंतुष्टि को तीव्र कर दिया है। दो दिन पहले बगमती नदी के किनारे स्थित आर्याघाट पर हुए इस दुष्कर्म ने जनजागरूकता को नई दिशा दी, जिससे विभिन्न विरोधी समूहों ने बालेन सरकार को प्रतिवाद करने के लिए एकत्रित होना शुरू किया।
पृष्ठभूमि और कारण
गनेश नेपाली, जो मुगु जिले से आया था, अपने मोटरसाइकिल पर पासपोर्ट कार्यालय के सामने पहियों पर पहिया‑लॉक लगाने के बाद पुलिस द्वारा उत्पीड़न का शिकार हुआ। विदेश में रोजगार की तलाश में पासपोर्ट बनवाने के लिए आया वह, जब सुरक्षा गार्डों ने उसकी मोटरसाइकिल को जाम कर दिया, तो उसने निराशा में खुद को जलाने का कदम उठाया। यह घटना बालेन सरकार द्वारा अप्रैल 26 को किए गए विस्थापन अभियान के बाद बढ़ते तनाव का प्रतीक बन गई।
सरकारी प्रतिक्रिया और मानवाधिकार चिंताएँ
विनाशकारी घटना के बाद सरकार ने जांच का वादा किया, प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया और मृतक की पत्नी को नौकरी की पेशकश की। हालांकि, इस कदम को कई मानवीय संगठनों ने अपर्याप्त कहा। कानून छात्र और जेन‑ज़ी कार्यकर्ता माजिद अंसारी, जो राष्ट्री स्वतंत्र पार्टी के माध्यम से बालेन की सत्ता में आने में भूमिका निभा चुके थे, को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया और हिरासत में रखा। अंसारी ने बताया कि उन्हें किसी कारण का उल्लेख नहीं किया गया और उन्हें किरतिपुर के अस्थायी आश्रय केंद्र से खाली करने का आदेश दिया गया, जहाँ विस्थापन पीड़ितों को अस्थायी रूप से रखा गया था।
जनआंदोलन और भविष्य की संभावनाएँ
गनेश के परिवार के साथ हुए अंत्यसंस्कार के बाद, सिंगह दरबार के सामने हजारों लोगों ने बालेन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। विरोधियों ने सरकार से गरीब वर्ग के प्रति अधिक सम्मान और पुनर्वास के ठोस वादे की मांग की। बड़े पैमाने पर रविवार को आयोजित होने वाले रैली को बारिश के कारण स्थगित किया गया, परन्तु अगले हफ्ते और भी बड़े प्रदर्शन की आशंका है।
संभावित परिणाम
यदि बालेन शाह सरकार इन मांगों को नजरअंदाज करती रही, तो यह राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों से बढ़ते दबाव को जन्म दे सकता है। इस प्रकार की सामाजिक उथल‑पुथल नेपाल के आर्थिक विकास और विदेशी निवेश को भी प्रभावित कर सकती है, विशेषकर जब पड़ोसी भारत और चीन दोनों ही इस क्षेत्र में अपने‑अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।