अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य में इरानी जहाज़ों पर प्रतिबंध दोबारा लागू किया और योग्य माल पर 20% टोल लगाने का ऐलान किया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और तेल बाजारों में उछाल आया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ट्रम्प ने होर्मुज में इरान-विशेष नाकाबंदी फिर से शुरू की
  • योग्य कार्गो पर 20% टोल लगाया जाएगा
  • तीव्र तनाव वैश्विक तेल कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है

संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका इरान के खिलाफ होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी को पुनः स्थापित कर रहा है और इस मार्ग से गुजरने वाले जहाज़ों पर 20 प्रतिशत टोल लेगा। यह कदम इरान‑अमेरिका के बीच चल रहे 60‑दिन के वार्ता चक्र के बीच आया, जिसमें दोनों पक्षों ने स्थायी शांति समझौते और ईरानी परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर बातचीत जारी रखी है।

पृष्ठभूमि

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के लगभग पाँचवें हिस्से तेल और गैस का परिवहन करता है। फरवरी 2024 में यू.एस. और इज़राइल ने इरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद से इरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण स्थापित किया है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मुक्त नौवहन का सिद्धांत है, पर इरान ने मध्यस्थता समझौते के तहत शुल्क वसूलने का अधिकार दावा किया है, जिसे अमेरिका ने अस्वीकार किया।

नवीनतम विकास

ट्रम्प ने ट्विटर पर कहा, “हम इरानी ब्लॉकएड को पुनः स्थापित कर रहे हैं, केवल इरानी जहाज़ों को रोकते हुए। अन्य सभी देशों को मुक्त उपयोग मिलेगा।” इस घोषणा के बाद इरान ने प्रतिशोध में कई देशों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें बहरीन, कुवैत और जॉर्डन शामिल हैं। यू.एस. ने भी इरान के एंटी-एयर सिस्टम, रडार और ड्रोन साइटों पर बड़े पैमाने पर हमले किए।

आर्थिक प्रभाव

नकदी में उछाल के बाद तेल की कीमतें लगभग 5 प्रतिशत बढ़ीं, लेकिन बाद में कुछ हद तक घट गईं। ब्रेंट के दाम $72.92 प्रति बैरल पर स्थिर हुए, जबकि युद्ध के चरम पर कीमतें $120 तक पहुंच गई थीं। इस तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे एशिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा है।

भविष्य की संभावनाएँ

अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता समूह—पाकिस्तान, क़तर और मिस्र—शांति समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश जारी रखे हुए हैं, पर दोनों पक्षों के बीच विश्वास का अभाव है। यदि टोल प्रणाली जारी रहती है, तो इरान को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ेगा, जबकि यू.एस. को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन के आरोपों से निपटना पड़ेगा। इस स्थिति में क्षेत्रीय गठबंधनों और वैश्विक तेल बाजारों की प्रतिक्रिया निर्णायक भूमिका निभाएगी।