हॉर्मुज की बंदी के बाद ईरान अब यमन के हुती समूह के माध्यम से बाब एल‑मेंडेब को निशाना बना रहा है, जिससे वैश्विक तेल और व्यापार मार्गों पर दोहरी दबाव की संभावना बढ़ी है। यह रणनीतिक कदम वाशिंगटन और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नई चुनौतियों का सामना करवा रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ईरान हुती समूह के साथ मिलकर बाब एल‑मेंडेब को बंद करने की तैयारी कर रहा है।
- हॉर्मुज और बाब एल‑मेंडेब दोनों को एक साथ दबाव में लाने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल की संभावना।
- संघर्ष के विस्तार से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
ईरान ने पहले ही स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज को बंद करके तेल परिवहन में बाधा उत्पन्न कर अपनी रणनीतिक शक्ति सिद्ध कर ली थी। अब वह यमन के हुती समूह के सहयोग से बाब एल‑मेंडेब, जो लाल सागर को अडेन की खाड़ी से जोड़ता है, को भी लक्ष्य बना रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का एक प्रमुख कड़ी है, जिससे इस पर कोई भी व्यवधान वैश्विक बाजार में तीव्र अस्थिरता ला सकता है।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
बाब एल‑मेंडेब की संकरी जलधारा सऊदी अरब के तेल निर्यात और विश्व भर के कंटेनर शिपिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2023 में गाज़ा युद्ध के बाद हुती समूह ने इस जलमार्ग पर कई हमले किए थे, जिससे जहाज़ों को दक्षिणी अफ्रीका के चारों ओर मोड़ना पड़ा और लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ईरान के लिए यह जलमार्ग एक अतिरिक्त लेवर बनता जा रहा है, जो हॉर्मुज के साथ दोहरा जकड़न बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ा सकता है।
विश्लेषकों की राय
मध्य पूर्व के विशेषज्ञ फावाज़ गर्जेस ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान का लक्ष्य दो प्रमुख चोकपॉइंट को एक साथ जोखिम में डालना है, जिससे संघर्ष द्विपक्षीय से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा तक विस्तारित हो जाएगा। उनका कहना है कि यह “मिशन क्रीप” की प्रक्रिया है, जहाँ दोनों पक्ष बिना सीधे युद्ध में उतरें क्रमशः दांव बढ़ाते हैं।
संभावित आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव
यदि बाब एल‑मेंडेब बंद हो जाता है, तो तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं, जैसा कि हुती समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है। इससे विश्वव्यापी आर्थिक अस्थिरता, विशेषकर विकासशील देशों में ऊर्जा महंगाई, और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में झटके लगने की संभावना है। साथ ही, यह अमेरिकी-ईरानी वार्ता को पुनः आरंभ करने के लिए दबाव का एक नया माध्यम बन सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष भी आर्थिक नुकसान से बचना चाहेंगे।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ
सऊदी अरब के गॉल्फ रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष अब्दुलाज़िज़ सागर ने कहा कि कई गल्फ राज्य अब ईरान के साथ कूटनीति की सीमाओं को पहचान रहे हैं, लेकिन वे किसी भी बड़े संघर्ष की लागत से बचना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हुती समूह की क्षमताएं अभी भी मौजूद हैं, पर उनका उपयोग केवल तब ही होगा जब ईरान स्पष्ट रूप से आदेश दे।