संयुक्त राज्य और ईरान के बीच 17 जून को हस्ताक्षरित समझौते को दो बड़े बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है – लेबनान में जारी युद्ध और होरमज़ जलडमरूमध्य की स्थिति, जिससे शतिरोध को खतरा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- लेबनान के संघर्ष ने मध्य पूर्व में शतिरोध को कमजोर किया।
- होरमज़ जलडमरूमध्य पर ईरानी जहाज़ों पर हमले ने अमेरिकी प्रतिक्रिया को तेज़ किया।
- त्रिपक्षीय तनाव के कारण अमेरिकी‑ईरानी शतिरोध की स्थिरता अब गंभीर प्रश्नों के घेरे में है।
संयुक्त राज्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 8 जुलाई, 2026 को अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते हुए कहा कि ईरान के साथ शतिरोध “समाप्त” हो चुका है। यह बयान अमेरिकी और ईरान दोनों द्वारा रात भर में किए गए प्रतिरोधी हवाई तथा समुद्री हमलों के बाद आया, जिसने पहले से ही नाजुक शतिरोध को और अधिक अस्थिर कर दिया।
लेबनान का युद्ध: शतिरोध का पहला बाधक
लेबनान में जारी संघर्ष, विशेषकर हेज़्बोला और इज़राइल के बीच बढ़ती हिंसा, मध्य पूर्व में सुरक्षा समीकरण को जटिल बना रही है। अमेरिका ने इस संघर्ष में अपनी रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ किया है, जबकि ईरान ने हेज़्बोला को समर्थन दिया है। इस दोधारी गतिशीलता ने दोनों देशों के बीच भरोसे को क्षीण किया, जिससे 17 जून को हस्ताक्षरित समझौते के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न हुई।
होरमज़ जलडमरूमध्य: तेल व्यापार की रीढ़
होरमज़ जलडमरूमध्य विश्व तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। अमेरिकी दावे के अनुसार, ईरान ने इस जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों पर कई हमले किए, जिसके जवाब में संयुक्त राज्य ने बड़े पैमाने पर प्रतिहिंसा के रूप में ईरानी तेल पर प्रतिबंध फिर से लागू किए और कई हवाई हमलों को अंजाम दिया। ईरान ने बहरैन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए प्रत्युत्तर दिया, साथ ही एक अमेरिकी MQ‑9 ड्रोन को गिराने का दावा किया। यह गतिशीलता शतिरोध को गंभीर रूप से चुनौती देती है।
भविष्य की संभावनाएँ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान का युद्ध बढ़ता रहा और होरमज़ जलडमरूमध्य पर शत्रुतापूर्ण कार्य जारी रहे, तो शतिरोध का पुनः स्थापित होना कठिन हो जाएगा। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से शांति की पुकार की है, परन्तु वास्तविक कदम अभी तक स्पष्ट नहीं दिखे। संभावित आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय गठबंधन इस समझौते के भविष्य को और अधिक अनिश्चित बना रहे हैं।
संक्षेप में, अमेरिकी‑ईरानी शतिरोध अब द्वि-आयामी चुनौतियों के सामने खड़ा है – एक ओर लेबनान में जमे हुए संघर्ष, और दूसरी ओर होरमज़ जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को लेकर बढ़ती टकराव। इन मुद्दों के समाधान के बिना, समझौता टूटने की संभावना अधिक है।