अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद इज़राइल के मोसाद ने उन्हें फिर से सत्ता में लाने की कोशिश की, लेकिन यह योजना पूरी तरह नाकाम हो गई। इस विफलता ने इज़राइल-ईरान संबंधों में नई जटिलताएँ पैदा कीं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • इज़राइल के मोसाद ने अहमदीनेजाद को वापस सत्ता में लाने का प्रयास किया।
  • ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ उनका संबंध बिगड़ गया था।
  • योजना असफल रही, जिससे मध्य पूर्व में रणनीतिक समीकरण बदल गया।

इज़राइल के गुप्त एजेंट मोसाद ने 2013 के बाद से महमूद अहमदीनेजाद के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, जब वह राष्ट्रपति पद से हटकर अपने विरोधी स्वर में बदल गए। अमेरिकी, ईरानी और पूर्व खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इस प्रयास का लक्ष्य अहमदीनेजाद को ईरान के मौजूदा शक्ति संतुलन को बिगाड़ते हुए एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में स्थापित करना था।

पृष्ठभूमि और कारण

अहमदीनेजाद ने 2005‑2013 के दौरान ईरान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक मुखर और उग्र रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके कार्यकाल के दौरान सैटेलाइट, परमाणु कार्यक्रम और रिव्यू के कारण ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए गए। 2013 में राष्ट्रपति पद से हटने के बाद, वे अपने पूर्व सहयोगियों के साथ मतभेदों में फँस गए, जिससे ईरान के मौजूदा नेतृत्व के साथ उनका संबंध तनावपूर्ण हो गया। इस घर्षण को मोसाद ने अपने रणनीतिक लाभ के रूप में देखा।

मोसाद की रणनीति

मोसाद का लक्ष्य दो‑मुख्य था: एक ओर ईरान के भीतर विभाजन को बढ़ावा देना, और दूसरी ओर एक ऐसे नेता को स्थापित करना जो इज़राइल‑सहित पश्चिमी देशों के साथ अधिक सहयोगी हो। अधिकारियों ने बताया कि मोसाद ने अहमदीनेजाद को आर्थिक समर्थन, मीडिया मंच और संभावित सैन्य सहयोग की पेशकश की। यह कदम इज़राइल के लिए एक संभावित बफर बन सकता था, जिससे ईरान की परमाणु नीतियों में बदलाव संभव हो सके।

योजना का पतन

परंतु ईरान के सुरक्षा एजेंसियों ने इस पहल को शीघ्र ही पहचान लिया और अहमदीनेजाद के साथ संभावित संपर्क को कड़ा कर दिया। साथ ही, ईरान के उच्चस्तरीय राजनीतिक वर्ग ने इस योजना को राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ माना और व्यापक विरोध किया। अंततः, अहमदीनेजाद ने मोसाद के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिससे यह गुप्त ऑपरेशन पूरी तरह नाकाम रहा।

भविष्य की संभावनाएँ

यह घटना इज़राइल की मध्य‑पूर्व में सक्रिय जासूसी रणनीति को उजागर करती है, लेकिन साथ ही यह दर्शाती है कि स्थानीय राजनीतिक गतिशीलता को बदलना आसान नहीं है। ईरान के भीतर शक्ति संरचना अभी भी स्थिर है, और भविष्य में इसी तरह के प्रयासों के लिए मोसाद को अधिक सावधानी बरतनी पड़ेगी।