NHPC के 2024 के एक तकनीकी शोध पत्र से खुलासा हुआ है कि टीस्ता-VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंगों में विस्फोट से पहले बार-बार ज्वलनशील गैसों के मिलने की घटनाएं दर्ज की गई थीं। यह त्रासदी 20 जुलाई को हुई, जिसमें कम से कम 15 श्रमिकों की जान चली गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- NHPC के 2024 के शोध पत्र में टीस्ता-VI सुरंगों में ज्वलनशील गैसों की उपस्थिति का उल्लेख था।
- 20 जुलाई 2026 को हुए विस्फोट में 15 श्रमिकों की मौत हो गई, जिसका कारण मीथेन गैस का अचानक निकलना माना जा रहा है।
- सुरंगों में गैस का रिसाव हार्ड क्वार्टजाइट और सॉफ्ट फाइलाइट चट्टानों के संपर्क बिंदु से होने की आशंका है।
- यह प्रोजेक्ट मूल रूप से लांको टीस्ता हाइड्रोपावर द्वारा शुरू किया गया था, जिसे बाद में NHPC ने अधिग्रहित किया।
सिक्किम के नामची जिले में स्थित टीस्ता-VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में हुई भीषण त्रासदी ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (NHPC) के इंजीनियरों द्वारा 2024 में लिखे गए एक तकनीकी शोध पत्र में इन सुरंगों के भीतर बार-बार ज्वलनशील गैसों के मिलने और आग लगने की घटनाओं का विवरण दिया गया था। यह शोध पत्र 'EUROENGEO 2024' सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था, जो इस दुर्घटना से काफी पहले का है।
रिपोर्ट के अनुसार, ज्वलनशील गैसों का पता सबसे पहले नवंबर 2009 में लगाया गया था। जब NHPC ने 2021 में काम फिर से शुरू किया, तो उन्होंने पाया कि सुरंगों की छत से गैस रिस रही थी और हैंडहेल्ड डिटेक्टरों ने मीथेन की सांद्रता दर्ज की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय के इस संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zone IV) में कार्बन-समृद्ध फाइलाइट चट्टानों के कारण मीथेन का खतरा हमेशा बना रहता है।
Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटना केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जब हम अत्यधिक कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खुदाई करते हैं, तो तकनीकी डेटा और वास्तविक सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच की खाई जानलेवा साबित हो सकती है।
अर्थव्यवस्था और नीति निर्माण के नजरिए से, यह घटना भविष्य के जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) के नियमों को और सख्त करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यदि गैस रिसाव जैसे ज्ञात खतरों को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह न केवल मानव जीवन बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी निवेश को भी खतरे में डाल देता है।
"ज्ञात भूगर्भीय जोखिमों का दस्तावेजीकरण होना और उनका प्रभावी शमन न होना, इंजीनियरिंग विफलताओं का सबसे बड़ा कारण बनता है।"
NHPC ने कहा है कि 20 जुलाई का विस्फोट सुरंग 4B के पास एक अचानक हुए मीथेन विस्फोट के कारण हुआ, जिसने श्रमिकों को सुरक्षित निकलने का समय नहीं दिया। वर्तमान में सिक्किम सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है जो इस बात की जांच कर रही है कि क्या ज्ञात चेतावनियों के बावजूद सुरक्षा उपायों में कोई कमी रह गई थी।
तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (Historical Background)
टीस्ता-VI परियोजना की शुरुआत 2006 के आसपास हुई थी। इसे मूल रूप से Lanco Teesta Hydropower Limited द्वारा विकसित किया जा रहा था, लेकिन 2012 में वित्तीय संकट के कारण काम रुक गया। लगभग नौ वर्षों तक परियोजना के ठप रहने के कारण सुरंगों में संरचनात्मक अस्थिरता और जलभराव की समस्या पैदा हो गई। 2019 में दिवाला प्रक्रिया के माध्यम से NHPC ने इसे अपने नियंत्रण में लिया और 2021 में पुनरुद्धार कार्य शुरू किया।
| विशेषता | पुरानी स्थिति (Lanco Era) | वर्तमान स्थिति (NHPC Era) |
|---|---|---|
| परियोजना नियंत्रण | Lanco Teesta Hydropower | NHPC (सरकारी नियंत्रण) |
| कार्य की स्थिति | 2012 में वित्तीय संकट के कारण बंद | 2021 में पुनरारंभ |
| मुख्य चुनौती | वित्तीय अस्थिरता | भूगर्भीय अस्थिरता और गैस रिसाव |
Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: दुर्घटना का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?
उत्तर: प्राथमिक जांच के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस का अचानक विस्फोट और उसके बाद हुआ भूस्खलन इसका मुख्य कारण है।
प्रश्न 2: क्या NHPC को गैस के खतरे के बारे में पहले से पता था?
उत्तर: हाँ, NHPC के 2024 के तकनीकी शोध पत्र के अनुसार, इंजीनियरों को सुरंगों में ज्वलनशील गैसों की उपस्थिति की जानकारी थी।