कोविड‑19 के बाद मीटिंगों में जबरदस्त वृद्धि ने कई कर्मचारियों को थकान और उत्पादकता में गिरावट का सामना कराया है। इस लेख में मीटिंग थकान के कारण, उसके मानसिक प्रभाव और प्रभावी समाधान पर प्रकाश डाला गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मीटिंगों में 60% की वृद्धि ने कार्यस्थल में थकान को बढ़ाया है।
- स्पष्ट एजेंडा और सीमित प्रतिभागी मीटिंग थकान को कम कर सकते हैं।
- ध्यान‑केन्द्रित कार्य के लिए कैलेंडर में ब्लॉक समय आवश्यक है।
कोविड‑19 महामारी के बाद से कार्यालयीन मीटिंगों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिससे कई कर्मचारियों को ‘मीटिंग थकान’ का सामना करना पड़ रहा है। Forbes की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के एक सर्वे में 6 में से 10 कर्मचारी बताते हैं कि मीटिंगें पहले से अधिक बढ़ गई हैं। इसी अवधि में, कंसल्टिंग फर्म Vyopta ने बताया कि 2020 से मीटिंगों में 60% की वृद्धि हुई, और 2023 तक 70% से अधिक कर्मचारियों ने मीटिंग की मात्रा में स्थिरता या वृद्धि देखी।
मीटिंग थकान के पीछे का विज्ञान
2025 में Cosmos द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन वीडियो कॉल्स मस्तिष्क को वह ऊर्जा निकालते हैं, जो शारीरिक मीटिंग नहीं कर पातीं। लगातार मीटिंग, कार्य, फिर मीटिंग और फिर कार्य के बीच स्विच करने से न केवल समय की हानि होती है, बल्कि संज्ञानात्मक क्षमता भी घटती है। मनोवैज्ञानिक गुर्लीन बारुह के अनुसार, “हमारा दिमाग लगातार एक चर्चा से दूसरी चर्चा में स्विच करने के लिए बना नहीं है; हर स्विच मानसिक ऊर्जा की खपत करता है।”
कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
मीटिंग थकान केवल उत्पादकता को ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की प्रेरणा, रचनात्मकता और निर्णय‑लेने की क्षमता को भी प्रभावित करती है। जब कार्य दिवस अंत में थकान के साथ समाप्त होता है, तो अक्सर वास्तविक काम की मात्रा कम रह जाती है, जिससे बर्नआउट की स्थिति उत्पन्न होती है। इस कारण, कंपनियों को मीटिंग की गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है, न कि मात्र मात्रा पर।
मीटिंग की अनावश्यकता को कम करने के उपाय
बारुह ने मीटिंग शेड्यूल करने से पहले तीन प्रमुख प्रश्न पूछने की सलाह दी है: क्यों यह मीटिंग आवश्यक है? क्या निर्णय लेना है? और कौन‑कौन उपस्थित होना चाहिए? अमेज़न के “दो पिज़्ज़ा नियम” के अनुसार, मीटिंग का आकार इतना छोटा होना चाहिए कि दो पिज़्ज़ा से सभी को खिलाया जा सके। एजेंडा को पहले से साझा करना, स्पष्ट कार्य‑बिंदु निर्धारित करना और अपडेट के लिए साझा दस्तावेज़ या प्रोजेक्ट‑मैनेजमेंट टूल का उपयोग करना भी प्रभावी उपाय हैं।
बर्नआउट से बचने के लिए रणनीतियाँ
जब भूमिका में मीटिंगों की मात्रा अधिक हो, तो समय प्रबंधन में सटीकता आवश्यक है। बारुह सुझाव देती हैं कि कर्मचारी अपने कैलेंडर में “फोकस्ड वर्क” के लिए समय ब्लॉक करें और इसे मीटिंग की तरह ही संरक्षित रखें। मीटिंग के बीच छोटे‑छोटे ब्रेक लेना, मानसिक रीसेट में मदद करता है। अंत में, व्यस्त रहने को उत्पादक रहने से अलग पहचानना चाहिए; सहयोग और गहन सोच दोनों ही सफल परिणामों के स्तंभ हैं।