विकलांगता अधिकार संगठनों और चिकित्सा समूहों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के कथित उपयोग की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इन हथियारों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।
मुख्य बातें
- पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन के उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध की मांग।
- 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हमले का आरोप।
- पीड़ितों के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग।
- स्थायी विकलांगता और गंभीर चोटों के मामलों की पुष्टि।
नई दिल्ली में 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के कथित उपयोग ने एक गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। प्रोग्रेसिव मेडिकोस एंड साइंटिफिक फोरम (PMSF) और नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेबल्ड (NPRD) के तहत आने वाले समूहों ने इन हथियारों के इस्तेमाल की कड़े शब्दों में निंदा की है।
इन संगठनों का कहना है कि पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन जैसे हथियार, जो स्थायी विकलांगता का कारण बन सकते हैं, उन्हें पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा नागरिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। समूहों ने मांग की है कि सरकार उन सभी अधिकारियों की जवाबदेही तय करे जिन्होंने इन हथियारों के उपयोग का आदेश दिया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा गैर-घातक लेकिन स्थायी रूप से दिव्यांग कर देने वाले हथियारों का उपयोग मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के बीच एक खतरनाक रेखा खींचता है। यदि इन हथियारों का अनियंत्रित उपयोग जारी रहता है, तो यह लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
"ऐसे हथियारों का उपयोग जिनका foreseeable परिणाम स्थायी विकलांगता है, नागरिक विरोध प्रदर्शनों की पुलिसिंग में बिल्कुल भी स्थान नहीं रखते हैं।"
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आई हैं। 19 वर्षीय साहिल लोचब, जिन्हें पेलेट से चोट लगी है, उनकी दृष्टि बचाने के लिए AIIMS के डॉक्टर संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी के चेहरे और गर्दन पर पेलेट के गहरे घाव हैं। PMSF ने पुष्टि की है कि कम से कम तीन मामले ऐसे हैं जहाँ सुरक्षा बलों द्वारा घातक हथियारों के उपयोग की पुष्टि हुई है, जिसमें दो लोग स्थायी रूप से विकलांग हो चुके हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पेलेट गन का उपयोग अक्सर अशांत क्षेत्रों या बड़े विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इनका उपयोग अक्सर अत्यधिक बल प्रयोग की श्रेणी में आता है, जिससे निर्दोष नागरिकों, विशेषकर युवाओं और दिव्यांगों को अपूरणीय क्षति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्रदर्शनकारियों ने किन हथियारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है?
उत्तर: संगठनों ने पेलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन जैसे हथियारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है जो स्थायी विकलांगता का कारण बन सकते हैं।
प्रश्न 2: इस घटना की जांच के लिए क्या मांग की गई है?
उत्तर: समूहों ने इस मामले में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है ताकि दोषियों की पहचान की जा सके।