लद्दाख जनगणना 2027 के माध्यम से स्वतंत्र भारत में पहली बार जातिगत डेटा एकत्र करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस प्रक्रिया में सुरक्षा कारणों से कागजी फॉर्म और खुले कॉलम पद्धति का उपयोग किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- लद्दाख में 17 अगस्त से जनगणना के दूसरे चरण (जनसंख्या गणना) की शुरुआत होगी।
- स्वतंत्र भारत में पहली बार जनगणना फॉर्म में जाति के लिए एक 'ओपन कॉलम' दिया जाएगा।
- सुरक्षा कारणों से लद्दाख में रक्षा प्रतिष्ठानों का डेटा डिजिटल के बजाय कागज पर दर्ज किया जाएगा।
- जनगणना फॉर्म में लगभग 40 विभिन्न मापदंडों पर सवाल पूछे जाएंगे।
भारत के सबसे युवा केंद्र शासित प्रदेशों में से एक, लद्दाख, स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करने जा रहा है। जनगणना 2027 के तहत, लद्दाख जाति गणना की प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा, जो देश में एक ऐतिहासिक कदम है। जनगणना का दूसरा चरण, जिसे 'जनसंख्या गणना' (PE) कहा जाता है, 17 अगस्त से लद्दाख और अन्य बर्फबारी वाले क्षेत्रों में शुरू होने वाला है।
जाति गणना की नई पद्धति: 'ओपन कॉलम' दृष्टिकोण
इस बार की जनगणना की सबसे खास बात इसकी पद्धति है। रिपोर्टों के अनुसार, जनगणना फॉर्म में जाति के लिए एक 'ओपन-एंडेड कॉलम' होगा। इसका अर्थ यह है कि उत्तरदाता स्वयं अपनी जाति का नाम बताएंगे और गणना करने वाला अधिकारी (enumerator) उसे उसी रूप में दर्ज करेगा। यह तरीका 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के अनुभवों पर आधारित है, हालांकि सरकार ने पहले के डेटा की सटीकता पर सवाल उठाए थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जाति का यह डेटा भविष्य की सामाजिक नीतियों और विकास योजनाओं के लिए आधारशिला बनेगा। लद्दाख का चयन न केवल इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण है, बल्कि यह प्रक्रिया के परीक्षण के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में भी कार्य कर सकता है।
जाति का खुला कॉलम डेटा संग्रह में होने वाली त्रुटियों को कम कर सकता है, लेकिन यह डेटा प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती भी पेश करेगा।
सुरक्षा और डिजिटल चुनौती: हालांकि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना है, लेकिन लद्दाख में एक महत्वपूर्ण अपवाद देखने को मिलेगा। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से सटे होने के कारण, यहाँ के महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों को डिजिटल रूप से 'जियो-टैग' करना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है। इसलिए, इन संरचनाओं का विवरण कागजी माध्यम से दर्ज किया जाएगा।
ऐतिहासिक संदर्भ
वर्ष 1931 की जनगणना में कुल 4,147 जातियाँ दर्ज की गई थीं। वर्तमान में, सरकार एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है जो अधिक सटीक और समावेशी हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. जनगणना 2027 में कितने प्रश्न पूछे जाएंगे?
संभावित रूप से जनगणना फॉर्म में लगभग 40 विभिन्न मापदंडों पर सवाल शामिल होंगे।
2. लद्दाख में डिजिटल जनगणना क्यों नहीं हो रही है?
सुरक्षा कारणों से रक्षा प्रतिष्ठानों की सटीक लोकेशन (Geo-tagging) को गुप्त रखने के लिए कागजी फॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।