स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी कि ईंधन, दवाओं और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग भू-राजनीतिक दबाव के लिए किया जा रहा है। उन्होंने भारत की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अनिवार्य बताया।

मुख्य बातें

  • पीएम मोदी ने संसाधनों और समुद्री मार्गों के 'हथियारीकरण' (weaponisation) के प्रति आगाह किया।
  • ऊर्जा सुरक्षा के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य पर जोर दिया गया।
  • समद्र मनथन योजना के माध्यम से गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को गति दी जाएगी।
  • सौर ऊर्जा उत्पादन में पिछले दशक में 2GW से 160GW की भारी वृद्धि हुई है।

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक गंभीर चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि कुछ देश अब ईंधन, दवाओं और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों को भू-राजनीतिक दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रणनीतिक समुद्री मार्गों, जैसे कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), के बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा किया। हालिया मध्य-पूर्व संघर्षों के कारण इन मार्गों पर समुद्री यातायात बाधित हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागत पर गहरा असर पड़ा है। भारत के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है, यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत की ऊर्जा निर्भरता उसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल भारत की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा है। यदि इन मार्गों पर कोई भी व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

संसाधनों का राजनीतिकरण वैश्विक व्यापार के लिए एक नया और खतरनाक खतरा है।

इस जोखिम को कम करने के लिए, सरकार ने ₹84,084 करोड़ की 'समद्र मनथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना' को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र और अल्ट्रा-डीपवाटर क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को तेज करना है। इसके अलावा, सरकार ने 99% तलछटी बेसिनों को अन्वेषण के लिए खोल दिया है ताकि घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

ऊर्जा स्रोतों में बदलाव: एक तुलना

क्षेत्र2014 की स्थिति2026 की स्थिति (अनुमानित)
पाइप्ड गैस कवरेज70 शहर700 शहर
सौर ऊर्जा क्षमता2 GW160 GW
LPG/पाइप्ड गैस लाभ22 लाख परिवार1.75 करोड़ परिवार

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि सौर ऊर्जा, परमाणु शक्ति और गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है, जिसे कम करने के लिए अब गहरे समुद्र में खोज अभियान चलाए जा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. प्रधानमंत्री ने किन संसाधनों के 'हथियारीकरण' की बात की?
प्रधानमंत्री ने ईंधन, दवाओं और तकनीक जैसे संसाधनों के भू-राजनीतिक दबाव के रूप में उपयोग की चेतावनी दी।

2. 'समद्र मनथन' योजना क्या है?
यह ₹84,084 करोड़ की एक योजना है जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना है।