दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान स्थित आईएसआई हेंडलर शाहजाद भट्टी के निर्देशों पर कार्य करने वाले आतंकवादियों की साजिश को उजागर कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। लक्ष्य में सिविल लाइन्स, अनंद विहार बस टर्मिनल और कई भीड़भाड़ वाले बाजार शामिल थे।
नई पुलिस लाइन, सिविल लाइन्स, अनंद विहार बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन और दिल्ली के कई व्यस्त बाजारों को आतंकवादियों की लक्ष्य सूची में रखा गया था, यह बात दिल्ली पुलिस ने हाल ही में स्पष्ट की। इस साजिश के पीछे पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (आईएसआई) के हेंडलर शाहजाद भट्टी के निर्देश थे, जिसका पता पुलिस ने अपराधियों के फोन रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक जाँच से लगाया।
आरोपीयों की ग्रिफ़्तारी और सबूत
पुलिस ने रात के समय विशेष टीम बनाकर चार प्रमुख क्षेत्रों में छापा मारा, जहाँ से छह संदिग्ध पकड़े गए। गिरफ्तार लोगों में दो सशस्त्र धारण करने वाले, दो रासायनिक विस्फोटकों के तैयारकर्ता और दो स्थानीय सहयोगी शामिल हैं। उनके मोबाइल फोन में भट्टी के साथ कई एन्क्रिप्टेड संदेश मिले, जिनमें लक्ष्य के विस्तृत मानचित्र और अंडरग्राउंड नेटवर्क की जानकारी थी।
पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क की गहरी जड़ें
शाहजाद भट्टी, जो लाहौर के निकट स्थित एक आईएसआई बेस में काम करते हैं, को कई वर्षों से भारत में आतंकवादी गतिविधियों के समन्वय के लिए जाना जाता है। पिछले दो दशकों में उन्होंने कई छोटे‑बड़े साजिशों को निर्देशित किया, जिनमें 2008 के मुंबई हमले, 2016 के वाराणसी ट्रेन बमिंग और 2023 के कश्मीर में अस्थायी हिंसक कारवाइयाँ शामिल हैं। इस बार उनका लक्ष्य दिल्ली के आर्थिक धड़ को गड़बड़ाकर रोज़मर्रा की जीवनधारा को बाधित करना था।
पिछले समान हमलों से सीख
दिल्ली ने 2005 में सेंट्रल लैंडमार्क पर बम विस्फोट, 2010 में काबुलिया बाजार में गोलीबारी और 2019 में अंबेडकर स्टेडियम के पास एक संभावित बमिंग को रोका था, जब सुरक्षा एजेंसियों ने समय से पहले चेतावनी जारी कर ली थी। इन घटनाओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और खुफिया साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता दिखायी। इस बार भी तेज़ी से किए गये ऑपरेशनों ने संभावित विनाश को रोका, जिससे सार्वजनिक भरोसा बना रहा।
भविष्य की सुरक्षा रणनीति
दिल्ली पुलिस ने कहा कि अब कई नई तकनीकी उपाय अपनाए जा रहे हैं, जैसे AI‑आधारित सिग्नल इंटेलिजेंस, सिटी‑वाइड CCTV इंटीग्रेशन और मोबाइल ट्रैकिंग। साथ ही, भारत‑पाकिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क को कम करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर कूटनीतिक दबाव भी बढ़ाया जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय दुरुपयोग को जड़ से खत्म करने में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही प्रमुख कुंजी होगी।
अंत में, पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने, अजनबी व्यक्तियों या संदिग्ध वस्तुओं की तुरंत रिपोर्ट करने और शांति एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सीमा पार आतंकवाद के ख़तरों को समझना और समय पर कार्रवाई करना, लोकतांत्रिक समाज की स्थिरता के लिये अनिवार्य है।