आंध्र प्रदेश में एक दिल दहला देने वाले हादसे में, सड़क पार करते समय मोबाइल फोन पर व्यस्त एक व्यक्ति को राज्य परिवहन की बस ने कुचल दिया। सीसीटीवी में कैद हुई इस घटना ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा और डिजिटल भटकाव के खतरों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
आंध्र प्रदेश से एक बेहद दर्दनाक और सबक सिखाने वाली घटना सामने आई है, जहां सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (APSRTC) की बस ने कुचल दिया। इस पूरी घटना का एक विचलित करने वाला वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के वक्त पीड़ित का पूरा ध्यान उसके मोबाइल स्क्रीन पर था, जिसके कारण वह सामने से आ रही भारी बस को नहीं देख सका और यह भीषण हादसा हो गया।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई लापरवाही
पुलिस प्रशासन द्वारा जांचे गए सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि पीड़ित व्यक्ति सड़क पार करते समय पूरी तरह से अपने स्मार्टफोन में मग्न था। उसने न तो सड़क के दोनों ओर देखा और न ही आने-जाने वाले वाहनों की गति का आकलन किया। जैसे ही उसने सड़क के बीच में कदम रखा, तेज गति से आ रही सरकारी बस की चपेट में आ गया। बस चालक ने अंतिम क्षणों में वाहन को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
'स्मार्टफोन जॉम्बी' बनता जा रहा है आधुनिक समाज
इस दुखद घटना ने आधुनिक समाज में बढ़ते 'स्मार्टफोन जॉम्बी' (Smombie) के खतरे को उजागर किया है। आज के समय में लोग सड़क पर चलते, गाड़ी चलाते और यहां तक कि भारी यातायात वाले क्षेत्रों में भी लगातार फोन स्क्रॉल करने या संदेश भेजने में व्यस्त रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल का उपयोग करते समय व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमता (cognitive awareness) और प्रतिक्रिया समय (reaction time) बेहद धीमा हो जाता है, जो सड़क पर मौत को निमंत्रण देने जैसा है।
सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी
भारत में सड़क सुरक्षा हमेशा से एक गंभीर चिंता का विषय रही है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर नागरिकों में जागरूकता की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय शहरों में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा (जैसे फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग और सबवे) न के बराबर है। जब तक पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित नहीं किए जाते और लोग स्वयं अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत नहीं होते, तब तक ऐसे हादसों को रोकना बेहद कठिन होगा।