रोहिणी के सेक्टर‑16 में चार‑मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग के ढहने से मृतकों की संख्या तीन हो गई। मृतकों में मकान मालिक के पति और एक निर्माण श्रमिक शामिल हैं, जबकि बचाव कार्य लगभग समाप्त हो गया है। कारण की जांच जारी है और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर‑16 में बुधवार को एक चार‑मंजिला निर्माणाधीन इमारत के अचानक ढहने से तीन लोगों की मौत हो गई। यह हादसा रात के समय हुआ, जब कई निवासी और कामगार इमारत के आसपास मौजूद थे। बचाव दल ने रात भर चलाए गए ऑपरेशन में दो शव निकाल कर मृतकों की संख्या को तीन तक पहुँचा दिया।
घटना का विस्तृत विवरण
इमारत का निर्माण पिछले एक साल से चल रहा था और लगभग पूरा होने के कगार पर थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस इमारत में दो दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट थे, प्रत्येक का आकार 26 वर्ग मीटर था। मकान मालिक के पति राम दुआ, 62, तथा साइट पर काम करने वाले काफे मोहम्मद (उपनाम नुरुल), 24, के शव पहचाने गए। इसके अलावा, एक बाईकर राम किशन, 42, जो घटना के समय पास से गुजर रहा था, भी मलबे के नीचे दब कर मर गया।
पीड़ितों के परिवारों की प्रतिक्रिया
पीड़ितों के परिवारों ने अस्पताल के मोर्टuary में इंतजार किया, जहाँ शवों को पोस्ट‑मॉर्टेम के बाद सौंपा गया। काफे के परिवार ने उत्तर प्रदेश के बहराच से यात्रा कर दुख जताया। उनकी माँ, सफिया बेगम ने बताया कि काफे ने केवल दो दिन पहले काम शुरू किया था। उसी दिन उनका चचेहरा, सद्दाम (उपनाम रवि), बचाया गया था। राम दुआ के परिवार ने बताया कि वह 50 साल से इस स्थान पर रह रहे थे और अपने बेटे की मृत्यु से गहरा शोक व्यक्त किया।
जांच और कानूनी कार्रवाई
रोहिणी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, शशांक जायसवाल ने कहा कि बचाव कार्य लगभग समाप्त हो गया है, परन्तु मलबा हटाना अभी जारी है। उन्होंने बताया कि घटना के कारण की पूरी जांच चल रही है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (हत्याकांक्षी हत्या) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।
दिल्ली में निर्माण सुरक्षा की बड़ी चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में कई निर्माण‑संबंधी ढहाव हुए हैं, जिनमें निर्माण मानकों की अनदेखी, अनियमित निर्माण सामग्री और अपर्याप्त निरीक्षण प्रमुख कारण रहे हैं। शहर के विकास प्राधिकरण को अब कड़े नियामक उपाय अपनाने और नियमित निरीक्षण को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।
इस घटना ने न केवल स्थानीय जनता में सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ा दी है, बल्कि प्रशासनिक निकायों को भी निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती दी है।