2024 में वरिष्ठ वकीलों के चयन को लेकर उठे विवाद के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने 85 वकीलों को वरिष्ठ वकील के रूप में मान्यता दी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है और इस प्रक्रिया में पारदर्शी साक्षात्कार प्रणाली अपनाई गई।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार शाम को एक पूर्ण न्यायालय बैठक में 85 वकीलों को वरिष्ठ वकील के रूप में मान्यता देने का फ़ैसला किया। यह निर्णय 2024 में हुई चयन प्रक्रिया के विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत पुनः समीक्षा करने के बाद आया है।

पृष्ठभूमि और 2024 का विवाद

नवंबर 2024 में, दिल्ली हाई कोर्ट की वरिष्ठ वकील चयन समिति ने 302 आवेदकों में से 70 को मान्यता दी, 165 को अस्वीकृत किया और 67 के मामलों को स्थगित कर दिया। इस निर्णय पर कई वकीलों ने आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। विशेष रूप से, स्थायी समिति के सदस्य सुधीर नंदराजोग ने अपनी इस्तीफ़ा पत्र में कहा कि अंतिम सूची उनके सहमति के बिना तैयार की गई है, जिससे प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठे।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और पुनर्समीक्षा

अप्रैल 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को आदेश दिया कि वह स्थगित और अस्वीकृत आवेदकों की पुनः समीक्षा करे, और यह कार्य दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील मान्यता नियम, 2024 के तहत किया जाए। इस निर्देश के बाद, एक पुनर्निर्मित स्थायी समिति का गठन हुआ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय अध्यक्षता में थे, साथ ही दो वरिष्ठ न्यायाधीश, अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल चेतन शर्मा, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एन. हरिहरन और पूर्व अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल संजय जैन शामिल थे।

नयी साक्षात्कार प्रक्रिया

2024 की तुलना में इस बार साक्षात्कार प्रक्रिया में उल्लेखनीय बदलाव किया गया। प्रत्येक वकील को पाँच से पंद्रह मिनट के एक‑से‑एक साक्षात्कार में भाग लेना पड़ा, जबकि पहले समूह‑आधारित साक्षात्कार होते थे जहाँ दस‑ग्यारह वकीलों को एक साथ बुलाया जाता था। इस नई प्रणाली को “पहला बार, स्वागत योग्य परिवर्तन” कहा गया, जिससे जजों को उम्मीदवारों की व्यक्तिगत योग्यता का अधिक गहरा आकलन करने का अवसर मिला। प्रश्नों में बुनियादी कानूनी सिद्धांतों से लेकर प्रक्रियात्मक कानून तक के विषय शामिल थे, जो तर्कसंगत सोच की मांग करते थे।

पदोन्नति प्राप्त प्रमुख नाम

नए वरिष्ठ वकीलों में विशेष सार्वजनिक अभियोजक अमित प्रसाद (2020 उत्तर‑पूर्व दिल्ली दंगे के मामलों में), ईडी विशेष सलाहकार ज़ोहेब हुसैन, पूर्व ईडी सलाहकार नितेश राणा, तथा दस महिला वकीलें, जिनमें मनाली सिंघल शामिल हैं, शामिल हैं। इन नियुक्तियों से कुल वरिष्ठ वकीलों की संख्या 2024 में मान्य 70 से बढ़कर 155 हो गई है।

भविष्य के प्रभाव

यह निर्णय न केवल कानूनी पेशे में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, बल्कि न्यायिक प्रणाली में भरोसे को भी सुदृढ़ करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यक्तिगत साक्षात्कार मॉडल भविष्य में भी लागू रहेगा, जिससे चयन प्रक्रिया में पक्षपात की संभावनाएँ घटेंगी और योग्य वकीलों को उचित मान्यता मिलने की संभावना बढ़ेगी।