कर्नाटक लोकायुक्त ने राज्य भर में 53 स्थानों पर छापेमारी कर 10 सरकारी अधिकारियों के पास से ₹49.83 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति बरामद की है। इसमें अचल और चल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं।

बेंगलुरु: कर्नाटक में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, कर्नाटक लोकायुक्त ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में 53 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई 10 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 'आय से अधिक संपत्ति' (Disproportionate Assets) के मामलों के सिलसिले में की गई। इस व्यापक तलाशी अभियान में अधिकारियों के पास से कुल ₹49.83 करोड़ की संपत्ति का खुलासा हुआ है।

संपत्ति का विवरण और वर्गीकरण

लोकायुक्त द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन 10 अधिकारियों के पास मौजूद संपत्ति को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। कुल संपत्ति में से ₹37.95 करोड़ की अचल संपत्ति (जैसे घर, जमीन और व्यावसायिक भवन) पाई गई है, जबकि ₹11.88 करोड़ की चल संपत्ति (जैसे नकदी, सोना, चांदी और वाहन) बरामद की गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कार्यभार संभालने के बाद दूसरा सबसे बड़ा तलाशी अभियान है।

प्रमुख अधिकारियों पर कार्रवाई

छापेमारी में शामिल अधिकारियों की सूची काफी विस्तृत है, जिनमें लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों से लेकर कृषि विपणन बोर्ड के उच्चाधिकारी तक शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, नरेन्द्र कुमार एम (सहायक अभियंता, PWD) के पास ₹5.75 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति मिली है, जिसमें तीन घर और चार एकड़ कृषि भूमि शामिल है। इसी तरह, कृषि विपणन बोर्ड की अतिरिक्त निदेशक पुष्पा डी.आर. के पास ₹7.37 करोड़ की अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ता दबाव

यह अभियान केवल एक घटना नहीं है, बल्कि हाल के दिनों में सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ते दबाव का संकेत है। इससे ठीक एक दिन पहले, लोकायुक्त ने बेंगलुरु जिले के विशेष उपआयुक्त सहित तीन अन्य अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी ली थी, जो 13 एकड़ सरकारी भूमि के अवैध आवंटन के मामले से जुड़े थे। लोकायुक्त अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब्त किए गए दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।