उज़्बेकिस्तान के बुखारा मेडिकल इंस्टिट्यूट में पढ़ रही 21 वर्षीय केरल की छात्रा की मौत पर परिवार ने जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया है। आरोपियों की गिरफ्तारी, दोहरी पोस्ट‑मार्टेम और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास इस केस को जटिल बना रहे हैं।

उज़्बेकिस्तान के बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे केरल के प्रथम वर्ष की मेडिकल छात्रा सवैरिया बासंथ (21) की शुक्रवार को मृत पाए जाने की खबर ने भारत में गहरी चिंता पैदा कर दी है। उसके पिता, कुवैत में कार्यरत बासंथ, ने तुरंत परिवार के साथ मिलकर केस की जांच की मांग की, जबकि भारतीय दूतावास ने शव को भारत वापस लाने और निर्यात प्रक्रिया में सहायता का आश्वासन दिया।

घटना का विवरण और आरोप

स्थानीय पुलिस के अनुसार, सवैरिया की मृत्यु का कारण सिर में चोट के बाद हुई सर्जरी के बाद हुई श्वास विफलता बताया गया है। परंतु सवैरिया के रिश्तेदार जनेश ने बताया कि दो छात्र, सदरुल अनाम (22) और सवैरिया, के बीच संबंध होने के बाद भी उन्होंने एक-दूसरे को बदलने की कोशिश की। जनेश ने कहा, "सदरुल ने सवैरिया को कई बार शारीरिक रूप से पीटा और उसे धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की, लेकिन वह इनकार करती रही।"

क़ैदी और कानूनी प्रक्रिया

उज़्बेकिस्तान की पुलिस ने 22 वर्षीय सदरुल अनाम को गिरफ्तार कर लिया है। केरल के हरिप्पड़ एसएचओ वी. विष्णु ने बताया कि केस की जाँच के लिए उन्हें उज़्बेकिस्तान के कानून प्रवर्तन एजेंसियों से आधिकारिक विवरण की प्रतीक्षा है। साथ ही, अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज में किया गया दूसरा पोस्ट‑मार्टेम ने शारीरिक हमले के संकेत दिखाए हैं, जिससे भारत में भी हत्या के मामले की दायरगी की गई है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सामाजिक प्रभाव

उज़्बेकिस्तान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा के बारे में यह मामला नई चुनौतियां पेश करता है। भारतीय दूतावास ने परिवार को निरंतर सूचना प्रदान करने और शव की वापसी में सहयोग देने का वादा किया है। इस घटना ने भारत-उज़्बेकिस्तान संबंधों पर भी सवाल उठाए हैं, खासकर विदेश में भारतीय छात्रों की सुरक्षा और संभावित धार्मिक उत्पीड़न के मुद्दे को लेकर।

समाज में प्रतिक्रिया और संभावित परिणाम

केरल में इस घटना को लेकर व्यापक सामाजिक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस तरह के "जबरन धर्म परिवर्तन" के आरोपों को लेकर कड़ी निंदा की है, जबकि कुछ ने इस मामले की कानूनी जाँच को तेज करने की मांग की है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह भारत में धार्मिक स्वतंत्रता एवं छात्र सुरक्षा के लिए नई नीतियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन सकता है।