गृह मंत्रालय ने देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए चार-स्तरीय 'स्मार्ट बॉर्डर' ग्रिड की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य घुसपैठ रोकना, नशा तस्करी का खात्मा करना और सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास करना है।

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को एक नए युग में ले जाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी और रणनीतिक 'स्मार्ट बॉर्डर' ग्रिड की रूपरेखा तैयार की है। गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार एक ऐसी चार-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली विकसित कर रही है जो न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को भी मजबूत करेगी। इस योजना में सीमा सुरक्षा बलों, राज्य और जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय समुदायों को एक एकीकृत तंत्र के रूप में जोड़ा जाएगा।

सुरक्षा के चार स्तंभ और रणनीतिक बदलाव

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का दृष्टिकोण अब 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) से बदलकर 'सक्रिय' (Proactive) हो गया है। पहले सुरक्षा व्यवस्था केवल अलग-थलग पड़ी सीमा चौकियों पर निर्भर थी, लेकिन अब एक एकीकृत ग्रिड के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान जमीनी स्तर से सीधे उच्च सरकारी स्तरों तक सुनिश्चित किया जाएगा। इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद और नक्सलवाद के बढ़ते खतरों को जड़ से समाप्त करना है।

नशा तस्करी और जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर प्रहार

सरकार ने आगामी तीन वर्षों के भीतर देश को नशीले पदार्थों के जाल से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही, गृह मंत्रालय ने 'डेमोग्राफी मिशन' (Demography Mission) के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर कड़ी नजर रखने की बात कही है। मंत्रालय का मानना है कि अवैध घुसपैठ ही इन परिवर्तनों का मुख्य कारण है, और सरकार इन कारकों को रोकने के लिए 'कठोर दृष्टिकोण' अपनाएगी।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और बुनियादी ढांचा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे में 400 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत, सरकार सीमा पर स्थित अंतिम गांवों को 'पहला गांव' बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य पलायन को रोकना, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करना और यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाएं हर पात्र नागरिक तक पहुंचें, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र सुरक्षित और समृद्ध बन सकें।