कौशाम्बी के 19 वर्षीय शिव प्रसाद को अपनी प्रेमिका के घर जाने पर उसके परिवार ने छड़ी, कुल्हाड़ी और लोहे की छड़ से मार दिया। पीड़ित की माँ ने पुलिस को बताया कि वह रात में मदद के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन वह अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ गया।

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के महुआ खड़ा गाँव में 19 वर्षीय शिव प्रसाद को अपनी प्रेमिका के घर जाने के बाद उसके परिवार द्वारा बेतहाशा मारपीट का शिकार बना कर मार दिया गया। यह घटना 10 जुलाई 2026 को हुई, जब शिव ने अपने प्रेमी के पिता राकेश लोढ़ी के घर पर मिलने का प्रयास किया।

घटना का क्रम

पुलिस के अनुसार, शिव ने शाम 7 बजे के आसपास अपने घर से निकल कर 50,000 रुपये इकट्ठा करने के बाद प्रेमिका के घर की ओर रुख किया। गाँव में पहुंचते ही वह राकेश लोढ़ी, उनके दो बेटे सचिन व दुर्गेश, पत्नी गेंडिया और पिता गुलज़ार सहित कई परिवारिक सदस्यों द्वारा घेर लिया गया। गवाहों ने बताया कि उन लोगों ने लकड़ी, कुल्हाड़ी, लोहे की छड़ और भाले जैसे तेज़ हथियारों से शिव को बार-बार मारना शुरू कर दिया।

पीड़ित की अंतिम पुकार

शिव ने अपने घर को देर रात 11:45 बजे एक भयभीत कॉल किया, जिसमें उसने कहा, "मम्मी, बचाओ, वे मुझे मार देंगे"। इस कॉल में उसने अपने हमलावरों के नाम भी बताए, जिससे पुलिस को तुरंत घटना की गंभीरता का पता चला। उसके बाद वह अपने परिवार के साथ अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर सिर की चोटों के कारण वह उसी रात ही दम तोड़ गया।

पुलिस की कार्रवाई

कौशाम्बी पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर दो संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और तीन विशेष जांच टीमों का गठन किया है। केस के तहत उचित धारा के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि प्रेमिका को हल्की चोटें आईं और वह जिला अस्पताल में इलाज करवा रही है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

इस प्रकार की हिंसा न केवल व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक संरचनाओं की जड़ता को भी उजागर करती है। ऐसे मामलों में न्याय की पहुंच और सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती को पुनः परखना आवश्यक हो जाता है।

समाज और न्याय प्रणाली पर प्रभाव

घटना ने सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों को चेतावनी दी है कि युवा वर्ग की प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है। साथ ही, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी और पारदर्शिता की मांग को भी उजागर करता है, जिससे भविष्य में समान घटनाओं को रोका जा सके।