मेरठ में 35‑वर्षीय कपिल ने अपने चार साल के बेटे को विष मिलाकर मारने के बाद वही पेय पीकर आत्महत्या की, परिवारिक झड़प ने बना दिया यह त्रासदीपूर्ण मामला.
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कपिल और उनका चार साल का बेटा कृष्णा दोनों ने विष मिश्रित पेय पीकर मौत का सामना किया।
- मामला पारिवारिक विवाद से उत्पन्न हुआ, जहाँ पत्नी कजाल ने अपने मातृ घर में रुकने का आग्रह किया।
- पुलिस ने दोनों पक्षों के परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू कर ली है और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के किथोरे पुलिस स्टेशन के अंतर्गत गविंदपुर शकरपुर गांव में 35‑वर्षीय कपिल और उनके चार साल के बेटे कृष्णा (उपनाम लड्डू) की मौत ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, कपिल ने अपने बेटे को एक सॉफ्ट ड्रिंक में ज़हर मिलाकर पिलाया, और बाद में वही पेय स्वयं पीकर आत्महत्या कर ली।
पृष्ठभूमि और विवाद
कपिल ने लगभग पाँच साल पहले गविंदपुर शकरपुर की रहने वाली कजाल से विवाह किया था। कजाल की बहन की शादी के बाद, वह अपने मातृ घर में रुकने लगी। जब कपिल ने उसे घर वापस लाने की कोशिश की, तो कजाल ने कुछ और दिनों के लिए रुकने का अनुरोध किया, जिससे दंपति के बीच तीव्र बहस छिड़ गई। इस विवाद के कई बार दोहराव के बाद, कपिल ने अत्यधिक तनाव के कारण अपने बेटे को विष मिश्रित पेय दिया।
घटना का क्रम
कहानी के अनुसार, कपिल ने अपने बेटे को विष मिलाकर पेय दिया, जिसके बाद बच्चा तुरंत बीमार हो गया। बच्चा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उसकी हालत बिगड़ गई और वह अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो गई। उसी समय, कपिल ने भी वही विष मिश्रित पेय पी लिया और गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद, वह शनिवार की सुबह उपचार के दौरान ही दम तोड़ गया।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी पहलू
किथोरे स्टेशन हाउस ऑफिसर सुबोध कुमार सक्सेना ने बताया कि दोनों पक्षों के परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी गई है, ताकि घटनाक्रम की सच्चाई का पता लगाया जा सके। मामले की जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह आत्महत्या के साथ-साथ हत्या का इरादा था, या यह भावनात्मक उन्माद के कारण हुआ एक दुर्भाग्यपूर्ण कार्य था। पुलिस ने कहा कि आगे की जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
समाज पर प्रभाव
यह दुखद घटना घरेलू विवादों की गंभीरता को उजागर करती है, जहाँ तनाव के क्षण में लोग अपरिवर्तनीय कदम उठा लेते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और मनोवैज्ञानिक इस बात पर बल दे रहे हैं कि पारिवारिक झगड़े को सुलझाने के लिए उचित संवाद और पेशेवर मदद ली जानी चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।