23 वर्षीय एलएलबी छात्रा आयुशी शर्मा ने अपनी 45 वर्षीय माँ की हत्या की योजना बनाई और उसे तेज़ कार से हुए सड़क हादसे के रूप में पेश किया। संपत्ति और सरकारी नौकरी के विवाद ने इस हत्याकांड को जन्म दिया, जिससे पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार कर जांच तेज़ कर दी है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • आयुशी शर्मा ने मां की हत्या की साजिश रची और इसे सड़क दुर्घटना दिखाया
  • संपत्ति व सरकारी नौकरी के विवाद ने प्रेरित किया
  • पुलिस ने हिटमैन, सहयोगी और रिश्तेदार सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया
  • सीसीटीवी फुटेज ने दुर्घटना की सच्चाई उजागर की

जयपुर, राजस्थान – इस हफ्ते पुलिस ने 23 वर्षीय अंतिम वर्ष की एलएलबी छात्रा आयुशी शर्मा को हिरासत में लिया, जब जांचकर्ताओं ने बताया कि उसने अपनी 45 वर्षीय माँ, नीरज शर्मा की हत्या को एक सड़कीय दुर्घटना के रूप में प्रस्तुत किया। घटना प्रकट नज़र आई जब तेज़ गति से गुजरते कार के कारण हुई “दुर्घटना” की रिपोर्ट को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से खंडित कर दिया।

पृष्ठभूमि: संपत्ति और नौकरी का विवाद

आयुशी के पिता, विजय कुमार शर्मा, एक सरकारी कर्मचारी थे। उनकी अचानक मृत्यु के बाद, परिवार में सरकारी पद के अधिकार को लेकर तीव्र बहस छिड़ गई। आयुशी ने परिवार के प्रति दया के आधार पर पद लेना चाहा, पर उसकी माँ ने ही इसे अपने नाम पर ले लिया। इस निर्णय ने आयुशी और उसकी माँ के बीच तनाव को बढ़ा दिया, जिसे बाद में संपत्ति के बंटवारे के विवाद में बदल दिया गया।

हत्या की साजिश और सहयोगी

जांच के अनुसार, आयुशी ने अपने चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। बलराम ने परिवार की संपत्ति में हिस्सेदारी के बदले में मदद करने की पेशकश की। पुलिस ने बताया कि दोनों ने 7 लाख रुपये के भुगतान पर एक हिटमैन को नियुक्त किया, जिसने नीरज शर्मा को उनके घर से ट्यूशन ले जाने के बाद ट्रैक किया और उन्हें टॉन्क रोड के कालीयाण नगर में स्थित एक घर में ले जाया।

जांच की प्रगति और साक्ष्य

असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस, हरीशंकर शर्मा ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज ने दिखाया कि कार की गति लगभग 12 किमी/घंटा थी, जिससे स्पष्ट हुआ कि कार ने जानबूझकर टक्कर मारी। साथ ही, कई फोन कॉल की निगरानी ने सहयोगियों की पहचान में मदद की, जो लगातार नीरज की चलन‑फिरन पर नजर रख रहे थे। अब पुलिस बचे हुए सहयोगियों, विशेषकर बलराम, को खोज रही है।

क़ानूनी और सामाजिक प्रभाव

यह मामला न केवल परिवारिक विवादों के बुरे परिणामों को उजागर करता है, बल्कि युवा वर्ग में नैतिक गिरावट की भी चेतावनी देता है। यदि साक्ष्य स्पष्ट हैं, तो अदालत को तेज़ी से मुकदमा चलाना होगा, ताकि न्याय की भावना बनी रहे और भविष्य में समान घटनाओं को रोका जा सके।