महाराष्ट्र के मोशी में कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजना के ढहने से 9 कर्मियों की मौत हो गई। 83‑घंटे की कठिन बचाव अभियान के अंत में अंतिम मृतक का शव मिला, जिससे परिवारों में गहरी शोकध्वनि गूँज रही है। अब जिम्मेदारी, मुआवजा और संभावित लापरवाही की जांच तेज़ी से चल रही है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मोहसी कचरा‑से‑ऊर्जा प्लांट में ढहाव, 9 मौतें
- 83 घंटे की बचाव में 23 में से 14 बचाए गए
- परियोजना कंपनी ने परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा व रोजगार वादा किया
जुलाई 8 को महाराष्ट्र के मोशी में स्थित कचरा‑से‑ऊर्जा संयंत्र के प्रशासनिक भवन पर जमा कचरे के ढेर ने अचानक ढह कर 23 कर्मचारियों को फँसा दिया। पाँच ने स्वयं बच निकलने में कामयाबी पाई, जबकि बचाव दल ने नौ को जीवित निकाल कर दो बचाए नहीं जा सके। इस दुर्घटना ने राज्य के सबसे घातक औद्योगिक हादसों में से एक का दर्जा हासिल किया।
बचाव का कठिन सफ़र
भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), फायर ब्रिगेड, पुलिस और पिंपरी चिंचवड नगर निगम के टीमों ने चार लगातार दिनों तक, लगभग 83 घंटे, खतरनाक परिस्थितियों में काम किया। विषाक्त गैसों, अस्थिर कचरे के ढेर, ढहते कंक्रीट के बीम और भारी स्तंभों ने बचाव को जोखिमपूर्ण बना दिया। शनिवार को क्षतिग्रस्त इमारत के एक हिस्से को तोड़कर अंदर की पहुँच बनाई गई, जिससे सात शव निकाले गए। रविवार सुबह 1 बजे अंतिम मृतक, वामन कासबे, का शरीर मिला, जिससे खोज समाप्त हुई।
परिणामस्वरूप मुआवजा व वादे
दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद परियोजना के ठेकेदार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का वादा किया। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने एक परिवार के सदस्य को स्थायी नौकरी और पीड़ितों के बच्चों की शिक्षा खर्च वहन करने का आश्वासन दिया। हालांकि, यह स्पष्ट हुआ कि यह राशि समूह बीमा के माध्यम से दी जाएगी, न कि सीधे कंपनी द्वारा, जिससे मुआवजा पैकेज की वैधता पर सवाल उठे।
जवाबदेही और जांच की मांग
बचाव समाप्त होते ही जांच और कानूनी कार्रवाई की लहर तेज़ हो गई। ठेकेदार एंटोनी, पिंपरी चिंचवड नगर निगम और संबंधित पर्यावरण प्राधिकरणों पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। स्थानीय निवासियों और पीड़ितों के रिश्तेदारों ने न्याय की माँग की है, यह पूछते हुए कि क्या इस प्रकार की त्रासदी को भविष्य में रोका जा सकता था।
भविष्य की दिशा
यह हादसा भारत में कचरा‑से‑ऊर्जा परियोजनाओं की सुरक्षा मानकों, नियामक निगरानी और श्रमिक सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे के बड़े ढेरों को संभालने के लिए आधुनिक तकनीक, नियमित निरीक्षण और कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण अनिवार्य है, ताकि ऐसी विनाशकारी घटनाओं से बचा जा सके।