देश के 119 सीमा जिलों के एसपी ने पहली बार आयोजित सम्मेलन में अवैध प्रवासियों की सूची, ड्रोन द्वारा हथियार एवं नशीली दवाओं की तस्करी और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के दुरुपयोग को प्रमुख मुद्दों के रूप में उजागर किया। इस चर्चा में बुनियादी ढांचे की कमी और ग्रामीण विकास की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अवैध प्रवासियों को मतदान सूची में शामिल करने की समस्या उजागर हुई
  • पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन से हथियार और ड्रग्स की तस्करी बढ़ी
  • व्हाट्सएप, स्क्रेड, ज़ैंगी जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का दुरुपयोग

भारत के 119 सीमा जिलों के सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (एसपी) ने 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित प्रथम "भूमि सीमा जिलों का एसपी सम्मेलन 2026" में कई गंभीर चुनौतियों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, गृह सचिव गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के महेश दीक्षित तथा 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुख शामिल थे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सीमा पर बढ़ते अपराध, जनसंख्या परिवर्तन और बुनियादी ढांचे की कमी को समझना और त्वरित समाधान निकालना था।

अवैध प्रवासियों का मतदान सूची में प्रवेश

असम में एक केस स्टडी ने दिखाया कि बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी ने फर्जी स्कूल लेविंग सर्टिफ़िकेट, पासपोर्ट और वोटर कार्ड प्राप्त करके चुनावी सूची में नाम दर्ज कराया। असम में अभी तक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का अंतिम संस्करण प्रकाशित नहीं हुआ है, जिससे 19 लाख से अधिक आवेदकों को बाहर रखा गया है। इस पर चुनाव आयोग ने विशेष संशोधन की बात कही थी, लेकिन असम में यह प्रक्रिया अभी भी अधूरी है। ऐसे मामलों ने सीमा क्षेत्रों में जनसंख्या नियंत्रण और पहचान प्रबंधन की जरूरत को उजागर किया।

ड्रोन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का दुरुपयोग

पाकिस्तान सीमा के निकट ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीली दवाओं की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि अधिक ड्रोन लैबोरेटरी स्थापित की जाएँ ताकि इन उडान‑वहीन वस्तुओं के मार्ग और स्रोत का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा सके। साथ ही, व्हाट्सएप, स्क्रेड और ज़ैंगी जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स को आपराधिक एवं आतंकवादी समूहों द्वारा सीमा पार सूचनाओं और सामग्रियों के आदान‑प्रदान में उपयोग किया जा रहा है, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन ऐप्स को ट्रैक करना कठिन हो रहा है।

सीमा गांवों का विकास और जनसंख्या प्रवाह

सीमा गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और रोजगार अवसरों की अनुपलब्धता के कारण कई निवासी शहरों की ओर प्रवास कर रहे हैं। इस प्रवाह को रोकने हेतु केंद्र ने "वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम" जैसी पहलें पेश की हैं, लेकिन अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, राजस्थान के पाकिस्तान सीमा के साथ मस्जिदों की वृद्धि और नेपाल सीमा के खुलापन का दुरुपयोग करने वाले खालिस्तान समर्थकों के मुद्दे भी चर्चा में रहे।

आगे का रोडमैप

समिति ने कहा कि सभी राज्यों को अपनी-अपनी सुझावों को दिसंबर तक प्रस्तुत करना होगा, और अगले डेढ़ साल में एक चौकोर सुरक्षा ग्रिड तैयार किया जाएगा, जिसमें स्थानीय पुलिस, सीमा समुदाय और अन्य संबंधित एजेंसियों को शामिल किया जाएगा। इस ग्रिड का उद्देश्य न केवल सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करना, बल्कि स्थानीय विकास को भी गति देना है।