मंगलुरु शहर में दो निर्माण स्थलों पर काम कर रहे 11 बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस ने अवैध प्रवासी घोषित कर हिरासत में ले लिया। चार नाबालिग भी शामिल थे, सभी राजशाही जिले के रहने वाले।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मंगलुरु पुलिस ने दो निर्माण साइटों से 11 बांग्लादेशी अवैध प्रवासी पकड़े
- उनमें से चार नाबालिग, सभी राजशाही जिले के निवासी
- पुलिस ने मध्यस्थ को भी जांच में शामिल कर दियेगा
कर्नाटक के दक्षिणी भाग में स्थित मंगलुरु शहर में, स्थानीय पुलिस ने दो निर्माण स्थलों पर काम कर रहे 11 बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध प्रवासी घोषित कर गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पिछले सप्ताह के समान ऑपरेशन के बाद की गई, जिसमें पहले ही आठ बांग्लादेशी को पकड़ा गया था।
पृष्ठभूमि
बांग्लादेश से भारत में काम करने के लिए कई श्रमिक सीमित कानूनी रास्ते अपनाते हैं, परंतु कई बार झूठी पहचान पत्र और फर्जी आधार कार्ड का उपयोग करके अवैध प्रवेश किया जाता है। यह समस्या विशेषकर निर्माण उद्योग में अधिक देखी गई है, जहाँ श्रमिकों की बड़ी मांग होती है।
ऑपरेशन का विवरण
जुलाई 9 को सुरथकाल पुलिस ने एक निर्माण स्थल पर आठ बांग्लादेशी प्रवासियों को हिरासत में ले लिया था। उसी सप्ताह, उरवा पुलिस स्टेशन को एक सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने कुंटिकाना में एक साइट पर तीन व्यक्तियों से पूछताछ की। रिकॉर्ड जांच के बाद, उन तीन में से सभी को अवैध प्रवासी घोषित किया गया। उसी दिन, कोडिकल में एक अन्य टीम ने 11 व्यक्तियों से पूछताछ की, जिसमें से आठ बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया।
पुलिस ने सात वयस्कों के नाम सार्वजनिक किए: मोहम्मद काउसर अली (21), मोहम्मद नूर अमीन (34), मोहम्मद नाहिदुल इस्लाम (22), मोहम्मद हमायन कोबिर (22), मोहम्मद रोमजान अली (23), मोहम्मद अब्दुल रहमान रोयेल (19) और मोहम्मद नॉयन (24)। सभी राजशाही जिले के रहने वाले थे। चार नाबालिग (उम्र 15‑17) भी इस समूह में शामिल थे।
कानूनी पहलू
पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट विदेशी रजिस्ट्री कार्यालय (FRRO) को भेजी जाएगी, जहाँ से हिरासत और निकासी के आदेश जारी किए जाएंगे। साथ ही, पश्चिम बंगाल के एक मध्यस्थ के खिलाफ भी केस दर्ज किया जाएगा, जिसने इन प्रवासियों को विभिन्न भारतीय राज्यों के साथ मिलाकर मंगलुरु में काम करने के लिए लाया था।
प्रतिक्रियाएँ और आगे का कदम
कोडिकल के पूर्व काउंसिलर किरण कुमार कोडिकल ने कहा कि यह मामला निर्माण कंपनियों को उनके श्रमिकों के दस्तावेज़ों की सख्त जांच करने की चेतावनी है। उन्होंने कहा, “यदि किसी कामगार पर संदेह हो तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।” यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि भविष्य में ऐसे मामलों की संभावना अभी भी बनी हुई है।
इस घटना ने कर्नाटक में अवैध प्रवासियों की समस्या को फिर से सार्वजनिक विमर्श में लाया है, जहाँ सरकार को रोजगार सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को संतुलित करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।