कार्यशील महिलाओं के फोरम (WWF‑I) और भारतीय महिला सहकारी नेटवर्क (ICNW) की अध्यक्ष नंदिनी आज़ाद को ‘भारत सम्मान‑2026’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान को मान्यता देता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नंदिनी आज़ाद को भारत सम्मान‑2026 मिला
- महिला सशक्तिकरण में उनके योगदान को मान्यता
- WWF‑I और ICNW के व्यापक प्रभाव की सराहना
नंदिनी आज़ाद, कार्यशील महिलाओं के फोरम (India) (WWF‑I) और भारतीय महिला सहकारी नेटवर्क (ICNW) की अध्यक्ष, को 21 जून को देहरादून में ‘भारत सम्मान‑2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रबंधन संस्थान और नई दिल्ली स्थित इकॉनमिक ग्रोथ फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया गया।
पुरस्कार का महत्व और चयन प्रक्रिया
‘भारत सम्मान‑2026’ भारत सरकार के सहयोग से स्थापित एक प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार है, जिसका उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन में अग्रणी कार्यकर्ताओं को पहचान देना है। नंदिनी आज़ाद को उनके दशक से अधिक वर्षों के निरंतर काम, विशेषकर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की महिलाओं को वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ले जाने के लिए चुना गया।
WWF‑I और ICNW का सामाजिक प्रभाव
WWF‑I और ICNW दो महिला‑नेतृत्व वाली जमीनी आंदोलन हैं, जो दक्षिण भारत के चार राज्यों में 6 लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ते हैं। इनके ‘जेंडर एण्ड इक्विटी मॉडल’ ने जाति, वर्ग और लिंग भेदभाव जैसी सामाजिक बाधाओं को तोड़ते हुए समावेशी विकास को प्रोत्साहित किया है। इन संगठनों द्वारा संचालित माइक्रो‑फाइनेंस, सामूहिक उत्पादन और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भविष्य की संभावनाएँ
भारत में महिला सशक्तिकरण का संघर्ष 1970 के दशक से चल रहा है, लेकिन आज़ाद जैसे नेताओं ने इसे व्यावहारिक स्तर पर लागू किया है। उनके कार्य ने न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया है, बल्कि नीति स्तर पर भी प्रभाव डाला है, जिससे कई राज्य सरकारें समान मॉडल अपनाने लगी हैं। भविष्य में इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराने से भारत में महिलाओं की आर्थिक सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
समाज में प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय
समाज विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. रजत मेहता ने कहा, “नंदिनी आज़ाद का कार्य सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास का दोहरा पुल है। उनका सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि को दर्शाता है, बल्कि समग्र समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”