2014 से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की कुल लंबाई 10,204 किमी निर्धारित की गई, जिसमें 9,329 किमी का निर्माण पूरा हो चुका है। इस विकास में लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 2014‑2026 में 10,204 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ आवंटित, 9,329 किमी पूर्ण
  • राज्य में कुल निवेश लगभग ₹1.94 लाख करोड़, FY 2025‑26 में ₹23,445 करोड़
  • मुख्य प्रोजेक्ट‑सुइट: मथुरा‑बरेली‑सीतारंग, आगरा‑अलीगढ़, कानपुर रिंग रोड, नोएडा‑ज्येवर हवाई अड्डा कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं राजमार्ग परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ उत्तर प्रदेश के राजमार्ग बुनियादी ढाँचे की स्थिति पर विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर गहन चर्चा हुई।

इतिहास और गति

2014 के बाद से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। इस अवधि में 10,204 किमी के प्रोजेक्ट आवंटित किए गए, जबकि 9,329 किमी का निर्माण पहले ही समाप्त हो चुका है। अप्रैल‑2025 से मई‑2026 तक 606 किमी नए प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए और 1,010 किमी राजमार्ग पूर्ण हुए, जिससे राज्य की आर्थिक गतिशीलता में नई जान आई है।

वित्तीय परिप्रेक्ष्य

राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल निवेश लगभग ₹1.94 लाख करोड़ बताया गया, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025‑26 में अकेले ₹23,445 करोड़ खर्च हुए। इस निवेश को तेज करने के लिये केंद्र‑राज्य सहयोग में कई उपाय लागू किए गए: मुख्य सचिव के अधीन एक टास्क‑फोर्स की स्थापना, ग्रीनफ़ील्ड प्रोजेक्ट्स के लिये मुफ्त मिट्टी, रिंग‑रोड एवं बायपास के लिये भूमि अधिग्रहण लागत का साझा करना, तथा सरकारी भूमि का नि:शुल्क प्रदान करना।

मुख्य प्रोजेक्ट्स की प्रगति

मैथुरा‑बरेली‑सीतारंग चार‑लेन परियोजना (लगभग ₹13,980 करोड़), आगरा‑अलीगढ़ (₹5,904 करोड़), आगरा‑ग्वालियर‑झांसी‑नागपुर आर्थिक कॉरिडोर, कानपुर रिंग रोड, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (ज्येवर) से जुड़ी छह‑लेन कनेक्टिविटी और मोरादाबाद‑काशीपुर चार‑और‑छह‑लेन परियोजनाएँ निर्धारित समय पर चल रही हैं। इनसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा प्रमुख औद्योगिक‑लॉजिस्टिक हब्स के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

पर्यावरण एवं सांस्कृतिक पहल

बरेली बायपास में वृक्षों को काटने के बजाय उन्नत तकनीक से स्थानांतरित करने की सलाह नितिन गडकरी ने दी, जिससे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो गया। आयोध्या रिंग रोड, राम वन गमन मार्ग, राम जानकी मार्ग और 84 कोसी परिक्रमा मार्ग जैसे धार्मिक‑सांस्कृतिक धरोहरों को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट्स भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, जो तीर्थयात्रियों के लिये आधुनिक सड़कों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

भविष्य की दिशा

आगामी योजनाओं में आयोध्या‑गोंडा, रेवा‑रांची चार‑लेन राष्ट्रीय राजमार्ग, तथा शमली‑गोरखपुर 742 किमी लंबा एक्सेस‑कंट्रोल्ड हाईवे शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कोरिडोर पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को नई आर्थिक धारा से जोड़ेंगे, जिससे निवेश, उद्योग, कृषि, पर्यटन और रोजगार में नई गति आएगी।