आंध्र प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत गैर-ऋणी किसानों के लिए 'स्व-प्रमाणन' प्रणाली शुरू की है, जिससे पंजीकरण में लगने वाली देरी कम होगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- गैर-ऋणी किसानों के लिए 'सेल्फ-सर्टिफिकेशन' प्रणाली की शुरुआत।
- पंजीकरण के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता समाप्त।
- सूखा और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए जागरूकता अभियान तेज।
- किरायेदार किसानों के लिए उर्वरक खरीदने की नई सुविधा।
आंध्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा सुधार करते हुए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत नामांकन प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब गैर-ऋणी (non-loanee) किसानों को बीमा कवर प्राप्त करने के लिए लंबी कागजी कार्रवाई और अतिरिक्त दस्तावेजों के इंतजार में नहीं रहना होगा। सरकार ने इसके लिए एक नई 'स्व-प्रमाणन प्रमाण पत्र' (Self-Certification Certificate) प्रणाली पेश की है।
प्रशासनिक सुधार और डिजिटल पहल
कृषि निदेशक मनाज़िर जीलानी समून ने हाल ही में राज्य भर के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नई व्यवस्था से किसानों को 'रैथु सेवा केंद्रों' (Rythu Seva Kendrams) से डिजिटल बुवाई क्षेत्र के दस्तावेजों के आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह कदम विशेष रूप से उन किसानों के लिए वरदान साबित होगा जो बैंक ऋण पर निर्भर नहीं हैं लेकिन फसल सुरक्षा चाहते हैं।
जलवायु परिवर्तन और सूखे की चुनौती
वर्तमान में राज्य में सूखे की स्थिति और अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए, प्रशासन ने सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पंजीकरण की समय सीमा और प्रीमियम भुगतान प्रक्रियाओं के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। जिला अधिकारियों को जिला कलेक्टरों और बैंकों के साथ समन्वय करने को कहा गया है ताकि बीमा कवरेज का दायरा बढ़ाया जा सके।
उर्वरक वितरण और किरायेदार किसानों को राहत
बैठक के दौरान उर्वरक आपूर्ति की निगरानी पर भी जोर दिया गया। उत्तर तटीय जिलों में भीड़भाड़ से बचने के लिए वितरण को विकेंद्रीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए डॉ. समून ने बताया कि किरायेदार किसानों (Tenant Farmers) को अब विशेष परिस्थितियों में भूमि सर्वेक्षण संख्या और खेती के विवरण के आधार पर उर्वरक खरीदने की सुविधा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य 2.75 करोड़ भूमि पार्सल का डिजिटल फसल सर्वेक्षण पूरा करना और 100% e-KYC सुनिश्चित करना है।