अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने उज्बेकिस्तान में मेडिकल छात्रा सावरीया बसंत की रहस्यमयी मौत पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि इस केस में धार्मिक रूपांतरण का दबाव और संभावित उग्रवादी नेटवर्क शामिल हो सकते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ABVP ने उज्बेकिस्तान में भारतीय छात्रा की मौत पर NIA जांच की मांग की।
- संघटन का आरोप है कि धार्मिक रूपांतरण का दबाव और उग्रवादी नेटवर्क इस हत्या में शामिल हो सकते हैं।
- सरकार से विदेश मंत्रालय और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वित कार्रवाई की अपील की गई है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने रविवार को उज्बेकिस्तान में भारतीय मेडिकल छात्रा सावरीया बसंत की मौत के संबंध में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक विस्तृत जांच शुरू करने का आग्रह किया। यह अनुरोध बीखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे छात्रा के अचानक निधन के बाद आया, जहाँ ABVP ने कहा कि इस घटना में सामूहिक रूप से धार्मिक रूपांतरण के दबाव और संभावित उग्रवादी नेटवर्क की भागीदारी हो सकती है।
पृष्ठभूमि और ABVP का बयान
ABVP ने अपने बयान में बताया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सावरीया को लगातार अपने धर्म बदलने के लिए दबाव दिया गया था। छात्रा ने इन प्रयासों का लगातार विरोध किया, जिसके बाद वह मारपीट या हत्या का शिकार हुई, यह आरोप संगठन ने लगाया। उन्होंने इस मामले को सिर्फ एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध के रूप में वर्गीकृत किया और सभी संभावित पहलुओं—आर्थिक लिंक्स, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, और साइबर ब्लैकमेल—की गहरी जांच की माँग की।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर प्रभाव
ABVP ने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया, जिसका शीर्षक था "संगठित आपराधिक और जिहादी मानसिकता को रोकना"। इस प्रस्ताव में ‘लव जिहाद’, धोखा, झूठी पहचान, मनोवैज्ञानिक दबाव और महिलाओं को लक्षित करने वाले साइबर ब्लैकमेल जैसी गतिविधियों के खिलाफ कड़ी सजा की माँग की गई। संगठन का मानना है कि ऐसी गतिविधियाँ न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता को भी खतरे में डालती हैं।
कूटनीतिक और कानूनी कदम
ABVP ने भारत के विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह उज्बेकिस्तान में भारतीय दूतावास और स्थानीय प्राधिकरणों के साथ मिलकर तेज़ जांच और अभियोजन सुनिश्चित करे। उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों, विशेषकर विदेश में पढ़ने वाली महिलाओं, के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की भी माँग की। इसके अलावा, उन्होंने एक कठोर राष्ट्रीय कानूनी ढाँचा स्थापित करने, तेज़ ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया, और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि NIA की जांच में यह साबित होता है कि कोई संगठित उग्रवादी नेटवर्क इस हत्या में शामिल था, तो यह भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों पर तनाव उत्पन्न कर सकता है और भारतीय छात्रों की विदेश में सुरक्षा नीति में पुनः समीक्षा की मांग कर सकता है। इस बीच, ABVP के राष्ट्रीय कार्यकारी सचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि ऐसी घटनाएँ महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित करती हैं।