जम्मू‑कश्मीर के सरनीगर में तीन दिवसीय दौरे में मुख्य सेना प्रमुख ने उत्तरी कमांड की सुरक्षा स्थिति, चिनार कॉरps की तैयारी और तकनीकी नवाचारों का विस्तृत ब्रीफिंग प्राप्त किया। इस यात्रा से भारतीय सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • COAS की उत्तरी कमांड में 3‑दिन की प्रथम यात्रा
  • लॉ ऑफ कॉंट्रोल के आसपास की तैनाती और आतंकवाद विरोधी ग्रिड की स्थिति
  • प्रौद्योगिकी एवं नवाचार अपनाने पर बल

जम्मू‑कश्मीर के सरनीगर में जनरल धीरज सेठ द्वारा आयोजित तीन‑दिन की यात्रा ने उत्तरी कमांड की रणनीतिक महत्ता को फिर से उजागर किया। यह उनका पहला आधिकारिक दौरा था, जो उन्होंने सेना प्रमुख पद संभालने के बाद किया। इस दौरान उन्होंने लूटे हुए क्षेत्रों में तैनात इकाइयों की युद्ध तत्परता, आतंकवाद विरोधी ग्रिड और लॉ ऑफ कॉंट्रोल (LoC) के निकट स्थित बुनियादी ढांचे की विस्तृत समीक्षा की।

पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्त्व

उत्तरी कमांड भारतीय सेना का वह प्रमुख खंड है जहाँ सीमा‑सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी संचालन और जनसुरक्षा के बीच जटिल संतुलन स्थापित करना आवश्यक है। पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में कई बड़े सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया गया है, जिससे सेना ने विशेषीकृत कॉरps जैसे चिनार कॉरps और व्हाइट नाइट कॉरps को स्थापित किया। COAS ने इन कॉरps की संचालनात्मक तत्परता, इंटर‑एजेंसी समन्वय और श्रि‍इ अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का ब्रीफिंग प्राप्त किया।

तकनीकी नवाचार और क्षमता वृद्धि

दौरे के दौरान जनरल सेठ ने भारतीय सेना द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन देखा। उन्होंने इंडियन आर्मी की स्वायत्त ड्रोन, इन्फ्रारेड निगरानी प्रणाली और उन्नत सिमुलेशन मॉड्यूल को सराहा, यह कहा कि भविष्य में इन नई तकनीकों को अपनाकर ऑपरेशनल प्रभावशीलता को और बढ़ाया जाना चाहिए। यह पहल राष्ट्रीय रक्षा को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सामुदायिक सहभागिता और nation‑first भावना

COAS ने कुपवाड़ा, उरी और मानसबाल में तैनात सैनिकों से मुलाकात की और उनके पेशेवर रवैये की प्रशंसा की। उन्होंने स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए सैनिकों द्वारा चलाए जा रहे जन‑केन्द्रित पहल की भी सराहना की। यह पहल न केवल सुरक्षा को सुदृढ़ करती है, बल्कि क्षेत्रीय विकास में सेना की भूमिका को भी उजागर करती है।

भविष्य की राह

जनरल धीरज सेठ ने सभी रैंकों के सैनिकों एवं केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति "Nation First" और "Viksit Bharat 2047" की दृष्टि को अपनाते हुए सतत तत्परता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तरी कमांड को भविष्य में भी चुनौतियों के अनुरूप तेज़ी से अनुकूलित होना चाहिए, ताकि भारत की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।