केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार पदत्याग की पेशकश की, परन्तु मोदी सरकार ने उनका इस्तीफा ठुकरा दिया। अंततः 31 जुलाई को उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेजा, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार किया। यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘NIT प्रश्नफांस’ आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है।

मुख्य बातें

  • धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार इस्तीफा दिया, पर सरकार ने पहले उसे अस्वीकार किया।
  • प्रमुख छात्र आंदोलन ने शिक्षा मंत्रालय से जवाबदेही की माँग की।
  • अंत में प्रधान ने 31 जुलाई को औपचारिक इस्तीफा सौंपा, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार किया।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

2023 के अंत में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित कई प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगा। इससे देश भर में छात्र संघों ने ‘NIT प्रश्नफांस’ आंदोलन शुरू किया, जो दिल्ली के संसद भवन तक पहुँच गया। पुलिस की लाठी चार्ज और कई गिरफ़्तारी के बाद भी आंदोलन की तीव्रता बढ़ी, जिससे शिक्षा मंत्री पर दबाव बना।

वर्तमान विकास

धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इस्तीफा देने की इच्छा जताई, परन्तु पार्टी के नेतृत्व ने उसे अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि “ऐसे समय में जिम्मेदारी से पीछे हटना नहीं चाहिए”। अंत में, 31 जुलाई को प्रधान ने अपने इस्तीफ़ा‑पत्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकृत किया।

सिजेपि की माँगें

ककोरोक जनता पार्टी (CJP) ने तीन मुख्य मांगें रखी: प्रश्नफांस के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा, आंदोलनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना, और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। सरकार ने दो मांगें मंजूर कर लीं, पर पहला मुद्दा अभी भी चर्चा में है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the resignation saga highlights the growing political risk of student-led protests in India and signals a shift in how the Modi government handles internal dissent within its cabinet.

“एक मंत्री का इस्तीफा न केवल व्यक्तिगत निर्णय है, बल्कि यह प्रशासनिक स्थिरता और सार्वजनिक विश्वास की परीक्षा भी है,” कहते हैं राजनीति विश्लेषक डॉ. अंजलि सिंह।
Did You Know?: प्रश्नफांस आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर 1.2 मिलियन से अधिक पोस्ट साझा किए गए, जिससे यह भारत के इतिहास में सबसे बड़े छात्र आंदोलन में से एक बन गया।

Frequently Asked Questions

  • धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कब स्वीकार किया गया? राष्ट्रपति ने 31 जुलाई को उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
  • ककोरोक जनता पार्टी की मुख्य मांगें क्या थीं? प्रश्नफांस से प्रभावित परिवारों को मुआवजा, आंदोलनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करना और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।