झारखंड CID ने 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप में पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले में एक ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ है।

मुख्य बिंदु

  • पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते और TDPL कंपनी के निदेशकों की गिरफ्तारी।
  • बिना टेंडर के ब्लैकलिस्टेड एजेंसी TDPL को परीक्षा का ठेका देने का आरोप।
  • मास्टरमाइंड अभय तिवारी द्वारा करोड़ों रुपये की रिश्वत और 20% कमीशन का खेल।
  • 12 सरकारी परीक्षाएं पास करने वाले अभय तिवारी पर नौकरी बेचने का संदेह।

झारखंड की CID ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाते हुए पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद की गई है। खियांगते, जो झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव भी रह चुके हैं, ने जुलाई 2026 में निष्पक्ष जांच के नाम पर इस्तीफा दिया था, लेकिन अब वे खुद इस बड़े घोटाले के केंद्र में हैं।

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी और संदिग्ध ठेका

जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले की जड़ नोएडा स्थित एक निजी कंपनी TDPL का चयन है। आरोप है कि इस कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, फिर भी इसे बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के 'नामांकन आधार' (Nomination Basis) पर परीक्षा आयोजित करने का ठेका दिया गया। JPSC की डिप्टी कंट्रोलर श्वेता गुप्ता ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। जब राज्य की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्था के शीर्ष अधिकारी ही संदिग्ध हों, तो पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। यह मामला झारखंड की नौकरशाही में गहरी पैठ बना चुके भ्रष्टाचार के नेटवर्क को उजागर करता है।

"सरकारी परीक्षाओं में निजी एजेंसियों का अनियंत्रित हस्तक्षेप और पारदर्शिता की कमी ही ऐसे बड़े घोटालों का मुख्य कारण बनती है।"

मास्टरमाइंड अभय तिवारी का रहस्यमयी प्रोफाइल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम अभय तिवारी का है, जिसे जांच अधिकारी मास्टरमाइंड मान रहे हैं। तिवारी ने राज्य और केंद्र स्तर पर 12 अलग-अलग सरकारी परीक्षाएं पास की हैं। CID अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या तिवारी ने अपने नेटवर्क का उपयोग पैसे लेकर सरकारी नौकरियां दिलाने के लिए किया। उनके परिवार के सदस्य भी इस जांच के दायरे में हैं, जिनमें से कुछ फिलहाल फरार हैं।

संबंधित व्यक्ति/संस्था भूमिका/आरोप वर्तमान स्थिति
एल. खियांगते पूर्व JPSC अध्यक्ष - प्रक्रियात्मक उल्लंघन गिरफ्तार
TDPL कंपनी निजी एजेंसी - धोखाधड़ी और रिश्वत निदेशक गिरफ्तार
अभय तिवारी कथित मास्टरमाइंड - वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में
क्या आप जानते हैं?: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के खिलाफ आक्रोश इतना बढ़ गया है कि रांची की सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे शहर में अराजकता की स्थिति बन गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: JPSC के पूर्व अध्यक्ष को क्यों गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: उन पर 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं और एक ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को गलत तरीके से ठेका दिलाने का आरोप है।

प्रश्न 2: इस घोटाले में TDPL कंपनी की क्या भूमिका थी?
उत्तर: TDPL ने कथित तौर पर अधिकारियों को करोड़ों की रिश्वत दी और बिना टेंडर के परीक्षा आयोजित करने का अनुबंध हासिल किया।