डिजिटलीकरण और सूचना का अधिकार (RTI) ने पारदर्शिता का वादा किया, लेकिन भ्रष्टाचार की लहरें अभी भी गहरी हैं। नेशनल एलीजिबिलिटी एंड एंट्रेंस टेस्ट (NEET) लीक के बाद छात्रों के विरोध ने इस प्रश्न को फिर से ताज़ा किया।
मुख्य बिंदु
- डिजिटलीकरण ने छोटी-छोटी भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया।
- RTI एक्ट अभी भी बड़े घोटालों को उजागर करता है, पर संस्थागत कमजोरी इसे कमजोर कर रही है।
- DPDP एक्ट ने पारदर्शिता को गंभीर रूप से सीमित किया है।
भ्रष्टाचार और डिजिटल युग
शैलेश गांधी और अंजलि भारद्वाज ने इस मुद्दे पर गहन चर्चा की, जहाँ अंजलि ने कहा कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने गरीब और अल्पसंख्यकों के लिए एक नया मध्यस्थ जोड़ दिया है, जिससे भ्रष्टाचार का दायरा बढ़ गया है।
भ्रष्टाचार अब केवल शीर्ष स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-शहर के छोटे-छोटे सरकारी कार्यालयों में भी प्रचलित है। डिजिटल फॉर्म भरने के लिए इंटरनेट तक पहुंच न होने वाले नागरिक अक्सर निजी कैफ़े में अत्यधिक शुल्क चुकाते हैं।
सूचना का अधिकार (RTI) का वास्तविक प्रभाव
अंजलि के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष लगभग छह मिलियन RTI अनुरोध दर्ज होते हैं – यह विश्व में सबसे अधिक है। इस कानून ने वैपाम स्कैम, अदर्श हाउसिंग सोसाइटी स्कैम और इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम जैसे बड़े घोटालों को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई है।
लेकिन शैलेश ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नई डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 ने RTI की प्रभावशीलता को कमजोर कर दिया है, जिससे भ्रष्टाचार से जुड़े डेटा को नागरिकों को दिखाना मुश्किल हो गया है।
संस्थागत कमजोरी या भ्रष्टाचार का कारण?
लोकपाल और लोकायुक्त जैसे निकायों की कार्यक्षमता पर सवाल उठते हैं। शैलेश ने कहा, “यदि हम नियमों को लागू नहीं करेंगे, तो भ्रष्टाचार घटेगा नहीं।”
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that persistent corruption erodes public trust, hampers foreign investment, and slows down India's ambition to become a $5 trillion economy by 2030. The interplay between weak institutions and entrenched graft creates a vicious cycle that threatens socioeconomic progress.
“भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए केवल डिजिटल समाधान नहीं, बल्कि सुदृढ़ grievance redressal mechanisms की जरूरत है।”
Frequently Asked Questions
Q1: क्या DPDP एक्ट वास्तव में RTI को कमजोर कर रहा है?
A: हाँ, इसने व्यक्तिगत जानकारी की परिभाषा को इतना विस्तृत कर दिया है कि अधिकांश भ्रष्टाचार-संबंधी डेटा को “व्यक्तिगत” माना जा सकता है और इसलिए नागरिकों को नहीं दिखाया जा सकता।
Q2: क्या छात्र आंदोलन भ्रष्टाचार विरोधी सुधारों को तेज़ कर सकता है?
A: संभावनाएं हैं; इतिहास दर्शाता है कि व्यापक जन आंदोलन ने 2011 में भारत एगेंस्ट करप्शन (भ्रष्टाचार विरोधी) आंदोलन को जन्म दिया था, जिससे कई कानूनों में संशोधन हुआ।