ओडिशा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसमें मलकानगिरी में सर्वाधिक प्रतिशत विलोपन दर्ज किया गया, जबकि गंजम और कटक जिलों में सबसे बड़ी संख्यात्मक कटौती हुई, जिससे राजनीतिक दलों में बहस छिड़ गई है।

ओडिशा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के बाद राज्य भर में 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। इस अभियान में, राज्य के सबसे दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र मलकानगिरी ने सर्वाधिक 27,653 मतदाताओं के नाम हटाकर एक चिंताजनक रिकॉर्ड बनाया है, जो कुल मतदाताओं का 10.96% है। मलकानगिरी, जो बांग्लादेश से आए बड़ी संख्या में प्रवासियों को आश्रय देता है, वहां इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना कई सवाल खड़े करता है।

मलकानगिरी का इतिहास 1950 के दशक की शुरुआत और 1980 के दशक के मध्य में बांग्लादेश से आए प्रवासियों के पुनर्वास से जुड़ा है, जिन्हें तत्कालीन ओडिशा सरकार ने विशेष गांवों में बसाया था। SIR से पहले, मलकानगिरी में 2,52,147 मतदाता थे, जो अब काफी कम हो गए हैं। इस क्षेत्र की विशिष्ट जनसांख्यिकी को देखते हुए, मतदाता सूची से इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता का विषय भी बन जाता है। इन विलोपनों का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

राज्यव्यापी आंकड़ों पर गौर करें तो, 5 जुलाई को प्रकाशित SIR की मसौदा रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा में कुल 3,33,99,591 मतदाता थे, जो अब घटकर 3,13,87,034 हो गए हैं। हटाए गए मतदाताओं में से 8.32 लाख (2.49%) मृत पाए गए, जबकि 10.07 लाख (3.02%) मतदाता या तो अनुपस्थित थे या स्थानांतरित हो गए थे। ये आंकड़े राज्य की गतिशील आबादी और शहरीकरण एवं प्रवास के पैटर्न को दर्शाते हैं।

जिलावार विश्लेषण से पता चलता है कि गंजम जिले में सर्वाधिक 2,07,626 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद कटक जिले में 1,55,164 नाम हटाए गए। गंजम अपनी प्रवासी श्रमिक आबादी के लिए जाना जाता है, जो देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों में काम करने जाते हैं। ऐसे में, इन जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं का 'अनुपस्थित' या 'स्थानांतरित' श्रेणी में आना स्वाभाविक लग सकता है, लेकिन इसकी गहराई से जांच आवश्यक है।

कुल 147 विधानसभा क्षेत्रों में से नौ ऐसे निर्वाचन क्षेत्र थे जहां 20,000 से अधिक नाम हटाए गए, जिनमें से आधे से अधिक प्रवासी-प्रवण क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त, 40 विधानसभा क्षेत्रों में 15,000 से अधिक नाम हटाए गए। इन आंकड़ों पर बिजू जनता दल (BJD) ने 5 जून, 2026 को ही आपत्ति जताई थी, जिसमें उसने दावा किया कि 20 लाख के बजाय 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कांग्रेस ने भी बड़ी संख्या में विलोपन पर चिंता व्यक्त की है, जिससे यह मुद्दा एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले रहा है।

ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सुशांत कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि SIR के पहले चरण में असामान्यताएं देखी गईं क्योंकि मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने थे, जबकि 10.07 लाख मतदाता या तो अनुपस्थित थे या स्थानांतरित हो गए थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लोगों के नाम मसौदा रिपोर्ट में नहीं हैं, उन्हें अपील करने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाएंगे। हालांकि, राजनीतिक दलों की आपत्तियां और मलकानगिरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च विलोपन दर आयोग पर पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने का दबाव बढ़ाती हैं।