कर्नाटक के मुख्य मंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु के दोहरे हवाई अड्डे की योजना को दक्षिणी गलियों तक सीमित करने की घोषणा की। लागत‑कम, भौगोलिक रूप से आसान और गांवों को विस्थापित न करने वाले स्थान को प्राथमिकता दी जाएगी।

कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के लिए दक्षिणी गलियों को संभावित स्थल के रूप में चुना है, यह घोषणा राज्य के मुख्य मंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को की। यह प्रस्ताव, जो केम्पेगौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के भीड़‑भाड़ को कम करने के लिए तैयार किया गया है, लागत‑कम, भू‑वैज्ञानिक रूप से आसान और सामाजिक रूप से संवेदनशील विकल्पों पर आधारित है।

पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

बेंगलुरु का केम्पेगौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, देश के तीसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे के रूप में उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण टर्मिनल क्षमता पर तनाव बढ़ा है, जिससे उड़ानों में देरी और यात्रियों की असुविधा बढ़ी है। इस संदर्भ में, मार्च 2026 के राज्य बजट में बेंगलुरु के लिए एक अतिरिक्त हवाई अड्डे की आवश्यकता स्पष्ट की गई थी, ताकि भविष्य में वाणिज्यिक और यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

स्थल चयन के मानदंड

शिवकुमार ने कहा कि अभी तक कोई विशिष्ट साइट सार्वजनिक नहीं हुई है, परन्तु दक्षिणी गलियों में वह जगह चुनी जाएगी जहाँ भूमि की कीमतें कम हों, भू‑रूपरेखा अधिक पहाड़ी न हो और तकनीकी रूप से परियोजना संभव हो। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि "गांवों को विस्थापित नहीं किया जाएगा"; केवल बिखरे हुए कुछ घरों को उचित मुआवजे के साथ स्थानांतरित किया जा सकता है। यह नीति सामाजिक असंतोष को न्यूनतम रखने और सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

पूर्ववर्ती सर्वेक्षण और संभावित साइटें

हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) ने पहले ही तीन संभावित स्थलों की जांच कर ली है: दो स्थान कणाकपुरा रोड के पास हरोहली में, और एक कूनिगल रोड, नेलामंगल में। इन सभी स्थलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया है, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि अधिग्रहण की जटिलता और कनेक्टिविटी को ध्यान में रखा गया है। अब सरकार इन रिपोर्टों को संकलित कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी, जिससे आगे की मंजूरी प्रक्रिया शुरू होगी।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

दूसरा हवाई अड्डा न केवल बेंगलुरु के हवाई यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी तेज करेगा। एरोस्पेस, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और रियल एस्टेट सेक्टर को नई नौकरियों और निवेश के अवसर मिलेंगे। साथ ही, दक्षिणी गलियों की बेहतर सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी की योजना भी इस परियोजना के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे शहर के समग्र इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा।

आगे का मार्ग

शिवकुमार ने कहा कि "हमने पिछले अनुभवों से सीख ली है और अब यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी गांव या समुदाय परियोजना के कारण असुविधा न झेले"। आगामी महीनों में विस्तृत लागत‑आंकड़े, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय मॉडल तैयार किए जाएंगे, ताकि केंद्र सरकार को एक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सके। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो निर्माण कार्य 2028 में शुरू हो सकता है, जिससे 2032 तक पूरी क्षमता का उपयोग संभव हो सकेगा।