राजस्व मंत्री जी. परमहेश्वर ने बेलगावी में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया कि सूखा‑समान स्थितियों से निपटने के लिए जिला‑तैलुका स्तर पर टास्क‑फ़ोर्स गठित किए जा रहे हैं, साथ ही 140 करोड़ पृष्ठों की भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण पूरा किया गया है।

कर्नाटक के उत्तर भाग में लगातार बरसात की कमी ने किसानों और पशुपालकों को गंभीर आर्थिक जोखिम में डाल दिया है। इस संदर्भ में राज्य के राजस्व मंत्री जी. परमहेश्वर ने बेलगावी में आयोजित विभाजन‑स्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि सरकार ने सूखा‑समान परिस्थितियों को समय पर संभालने के लिए विशेष टास्क‑फ़ोर्स तैयार किए हैं।

पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

पिछले दो वर्षों में उत्तर कर्नाटक में औसत वर्षा में लगभग 17% की कमी दर्ज की गई है, जिससे कई जिलों में जल की कमी और फसल के नुकसान की स्थिति बनी हुई है। साथ ही, केंद्रीय सरकार द्वारा केवल 50% उर्वरक आपूर्ति करने की शिकायत भी परमहेश्वर ने उठाई, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है।

सरकारी उपाय और टास्क‑फ़ोर्स की भूमिका

परमहेश्वर ने बताया कि जिला‑तैलुका स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी, जैसे कि डिप्टी कमिश्नर, जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी और स्थानीय पुलिस अधिकारी, नियमित बैठकें करेंगे और जल संकट, चारे के किट, तथा आधुनिक वर्षा माप उपकरणों की तैनाती को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा कि सभी वर्षा माप स्टेशन को आधुनिक बनाकर वास्तविक वर्षा आँकड़े हासिल किए जाने चाहिए, जिससे समय पर राहत कार्य संभव हो सके।

भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण

राजस्व विभाग ने राज्य भर में 140 करोड़ पृष्ठों की भूमि अभिलेखों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया है, जो भूमि सुरक्षा और पारदर्शिता में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, बेलगावी राजस्व विभाजन में अभी भी 14.88% अभिलेखों का डिजिटलीकरण बाकी है, जिसे शीघ्र पूरा करने की योजना बनाई गई है। इस पहल से भूमि विवादों में कमी और कृषि ऋण प्रक्रिया में तेजी की उम्मीद है।

नए राजस्व गांवों की घोषणा और भविष्य की दिशा

राजस्व विभाग ने 1,457 नई बस्तियों को राजस्व गांव घोषित करने की योजना बताई है, जिसमें से 937 गांवों के लिए प्रारंभिक अधिसूचना जारी हो चुकी है। अंतिम अधिसूचना 2027 के जनगणना के बाद जारी की जाएगी, जिससे स्थानीय प्रशासन को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

परमहेश्वर ने राज्य के मुख्य मंत्री के साथ समन्वय पर ज़ोर देते हुए कहा कि सभी अधिकारी जनता की आवाज़ सुनें, कानून व्यवस्था बनाए रखें और विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाएँ। इस समग्र दृष्टिकोण से कर्नाटक में सूखा‑समान स्थिति को नियंत्रित करने और कृषि उत्पादन को पुनर्जीवित करने की उम्मीद की जा रही है।