पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 25% एथनॉल वाला ई25 अभी केवल परीक्षण चरण में है और इस फ़्यूल के बड़े पैमाने पर रोल‑आउट का कोई तय निर्णय नहीं लिया गया है। रोड ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने एथनॉल की कम कैलोरी वैल्यू और माइलेज पर संभावित प्रभाव पर प्रकाश डाला।

नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 10 जुलाई को कहा कि E25 – 25% एथनॉल मिलाकर बनाया गया पेट्रोल – अभी केवल परीक्षण चरण में है और इस मिश्रण को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। यह बयान तब आया जब विभिन्न राजनैतिक और उद्योग‑संबंधी स्रोतों से ईंधन मिश्रण के संभावित रोल‑आउट की खबरें सामने आ रही थीं।

भारत में एथनॉल मिश्रण का पृष्ठभूमि

पिछले दो दशकों में भारत ने एथनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां अपनाई हैं। 2019 में 10% एथनॉल मिश्रण (E10) को अनिवार्य किया गया था, जिसके बाद 2022 में E15 के परीक्षण के साथ राज्य‑स्तर पर प्रयोग शुरू हुए। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य आयात‑निर्भर पेट्रोल की लागत घटाना, कृषि‑आधारित एथनॉल उत्पादन को मजबूत करना और पर्यावरणीय लाभ हासिल करना रहा है।

वर्तमान में E25 का परीक्षण

पुरी ने कहा, “E25 अभी केवल परीक्षण में है, और इसका टाइम‑लाइन अभी स्पष्ट नहीं है।” उन्होंने बताया कि सरकार वैज्ञानिक अध्ययन, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके ही किसी भी बड़े निर्णय पर पहुँचेगी। इस परीक्षण में विभिन्न कार निर्माताओं के साथ मिलकर ईंधन‑संगतता, इंजन‑पावर और उत्सर्जन‑नियंत्रण पर विस्तृत डेटा एकत्र किया जा रहा है।

मंत्रियों के बयान और हितधारकों की राय

रोड ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा के बाद कहा कि “एथनॉल की कैलोरी वैल्यू कम होने के कारण माइलेज पर मामूली असर पड़ता है, लेकिन यह सड़क और ट्रैफ़िक स्थितियों पर भी निर्भर करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध वैकल्पिक ईंधनों की विविधता होना चाहिए, जैसे मीथेनॉल‑आधारित फ्यूल, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरतों के अनुसार चयन कर सकें। गडकरी ने फलेक्स‑फ़्यूल वाहनों को प्रोत्साहित करने की बात दोहराई, जहाँ उच्च एथनॉल मिश्रण को अपनाने की संभावना है।

उपभोक्ताओं और ऑटो उद्योग पर संभावित प्रभाव

यदि E25 को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाता है, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल की कीमत में संभावित कमी का लाभ मिल सकता है, क्योंकि एथनॉल का उत्पादन घरेलू स्तर पर सस्ता हो सकता है। हालांकि, एथनॉल की कम ऊर्जा घनत्व के कारण वाहन की माइलेज में छोटी‑छोटी गिरावट देखी जा सकती है, जिससे ड्राइवरों को अधिक ईंधन भरना पड़ सकता है। ऑटो उद्योग को भी इंजन‑डिज़ाइन, फ्यूल‑इंजेक्टर्स और एग्ज़ॉस्ट सिस्टम को एथनॉल‑उच्च मिश्रण के अनुकूल बनाना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी।

भविष्य की दिशा

जैसे‑जैसे परीक्षण आगे बढ़ेगा, सरकार को एथनॉल की उपलब्धता, कीमत, पर्यावरणीय लाभ और तकनीकी चुनौतियों को संतुलित करना होगा। पुरी ने कहा कि “भविष्य में यदि कोई भी वाहन‑इंजन को मिश्रित ईंधन से नुकसान हुआ, तो संबंधित व्यक्ति सीधे मेरे पास शिकायत कर सकते हैं”, यह संकेत देता है कि प्रशासनिक स्तर पर शिकायत‑निवारण तंत्र तैयार किया जा रहा है। इस प्रकार, E25 का अंतिम निर्णय अभी भी कई अनिश्चितताओं के अधीन है।