20 जून से चल रही भूख हड़ताल के 11वें दिन, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वजन 7 किलोग्राम घट गया है। कॉकपच पार्टी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है, जबकि परीक्षा अनियमितताओं पर आक्रोश जारी है।

सोनम वांगचुक, प्रतिष्ठित जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद्, ने 20 जून से चल रही भूख हड़ताल के 11वें दिन अपने वजन में 7 किलोग्राम की कमी दर्ज कराई है, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति और भी बिगड़ गई है। यह कदम कॉकपच (Cockroach Janta Party) द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ जुड़ा हुआ है, जो बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ है।

भूख हड़ताल का प्रगति

डॉ. वांगचुक का वजन 59.40 किलो पर पहुंच गया है, और स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार उनका रक्तचाप 103/68 mm Hg (बैठे हुए) और 111/73 mm Hg (लेटे हुए) है। हृदय गति 74 बीट प्रति मिनट, रक्त शर्करा 75 mg/dL, और ऑक्सीजन संतृप्ति 98% रही, जो मानसिक रूप से सतर्क रहने के बावजूद शारीरिक थकान को दर्शाती है।

राजनीतिक समर्थन और चुनौतियाँ

कॉकपच का 19वां दिन, दिल्ली हाई कोर्ट ने पार्टी के मूल X खाते को बहाल किया, जिसे मई में रोक दिया गया था। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस फैसले को "मुक्त भाषण और डिजिटल अधिकारों के लिए बड़ी जीत" कहा। साथ ही, सम्यक किसान मोर्चा, सीपीआई(एमएल) लीवरेज और अन्य छात्र संगठनों ने भी हड़ताल में समर्थन जताया, जिससे आंदोलन का दायरा बढ़ा।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

मई में आयोजित राष्ट्रीय योग्यता एवं प्रवेश परीक्षा (NEET‑UG) पर पेपर लीक के आरोपों के कारण उसे रद्द कर दिया गया और 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित की गई। यह घटना कई छात्रों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल रही है, जिनमें से कुछ ने आत्महत्या भी कर ली है। कॉकपच के मांगों में प्रधान मंत्री के इस्तीफे, NTA के समाप्ति, और पीड़ित परिवारों को मुआवजा शामिल है।

भविष्य की दिशा

कॉकपच ने 20 जुलाई को संसद में मार्च की घोषणा की है, जिसमें छात्र, अभिभावक और आम जनता को भाग लेने के लिए बुलाया गया है। यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और भी तीव्र हो सकता है, जिससे भारत की शिक्षा नीति पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।