कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से लेनदेन की अनुमति दी है, जिससे ममता बनर्जी गुट को पार्टी के वित्तीय कार्यों को चलाने में बड़ी मदद मिलेगी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी घमासान के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की अनुमति देते हुए यह अधिकार ममता बनर्जी के गुट को सौंप दिया है। यह फैसला उस समय आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और संपत्ति को लेकर गहरा संघर्ष चल रहा है।

अदालती आदेश और विशेष अधिकारी की नियुक्ति

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार को एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। अदालत के निर्देशानुसार, बैंक खातों से होने वाला कोई भी खर्च केवल दो अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित चेक के माध्यम से ही किया जा सकेगा। विशेष अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि इन खातों का उपयोग केवल पार्टी के नियमित प्रशासनिक और परिचालन खर्चों के लिए ही हो, न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए।

पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने खातों को फ्रीज करने के पुलिस के पिछले कदम पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि 18 जून को एफआईआर दर्ज होने के मात्र एक दिन बाद, यानी 19 जून को ही खातों को फ्रीज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि पुलिस के पास खातों को फ्रीज करने के लिए कोई पर्याप्त या ठोस सबूत नहीं थे जो इतने त्वरित और कठोर कदम को सही ठहरा सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता नहीं देता है, क्योंकि यह मामला अभी भी चुनाव आयोग के विचाराधीन है।

राजनीतिक संकट और ममता बनर्जी की स्थिति

यह कानूनी जीत ममता बनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण संजीवनी मानी जा रही है। हालिया चुनावों के बाद, टीएमसी के भीतर भारी विभाजन देखा गया है। पार्टी के लगभग 20 सांसदों का एनसीपीआई (NCPI) में विलय और कोलकाता में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 से अधिक विधायकों का अलग होना पार्टी के लिए बड़ा झटका था। ऐसे में, पार्टी के मुख्यालय और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण की लड़ाई में यह फैसला ममता बनर्जी के पक्ष में एक मजबूत मोड़ है।