एक सरकारी अंतर‑विभागीय समिति ने OTT प्लेटफ़ॉर्म ZEE5 पर रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में प्रतिबंधित रखने की सिफ़ारिश की। समिति का कहना है कि फिल्म राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालती है और आतंकवाद को सफ़ेदीकरण करती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इंटर‑डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) ने ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध बरकरार रखने की सिफ़ारिश की।
- फिल्म को राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन और आतंकवाद को सफ़ेदीकरण का आरोप लगाया गया।
- भविष्य में OTT सामग्री पर सरकारी निगरानी और सेक्शन 69A के प्रयोग की आशंका बढ़ी।
नई दिल्ली – 11 जुलाई, 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी पैनल ने हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में प्रतिबंधित रखने की सिफ़ारिश की है। यह फिल्म, जिसका निर्देशन हनी त्रेहन ने किया है और जिसमें दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं, 1990 के दशक के पंजाब के विद्रोह को दर्शाती है और मानवीय अधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खलरा की कहानी पर आधारित है।
इंटर‑डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की भूमिका
इंटर‑डिपार्टमेंटल कमेटी, जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B) के अधीन कार्य करती है, ने सेक्शन 69A के तहत फिल्म को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति खतरा’ बताकर प्रतिबंध की सिफ़ारिश की। इस पैनल में I&B, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, महिला एवं बाल विकास, विदेश मामलों, रक्षा और न्याय विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति ने यह भी कहा कि फिल्म का कथानक राज्य की संप्रभुता और एकता के विरुद्ध है तथा विरोधी तत्वों को प्रेरित कर सकता है।
‘सतलुज’ की सामग्री एवं विवाद
फिल्म में जसवंत सिंह खलरा की पुलिस हिरासत में हुई मृत्यु को दिखाया गया है, जिनकी जांच में सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में पाँच पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फिल्म ने 1990 के दशक के असंतोषपूर्ण समय में राज्य द्वारा किए गए ‘विरोधी कार्यों’ को उजागर किया, जबकि सशस्त्र विद्रोहियों के हिंसक कृत्यों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखाया गया। IDC ने कहा कि यह पक्षपाती प्रस्तुति राज्य सुरक्षा को कमजोर कर सकती है और सेपरेटिस्ट विचारधाराओं को बढ़ावा दे सकती है।
डिजिटल मीडिया नियमन में नया मोड़
‘सतलुज’ पर प्रतिबंध का मामला भारत के 2021 के सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडिएरी गाइडलाइन और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियमों के तहत पहली बार नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई OTT प्लेटफ़ॉर्म को समान कारणों से प्रतिबंधित किया गया है, जिससे मीडिया स्वतंत्रता और सेंसरशिप के बीच संतुलन पर सवाल उठते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्शन 69A का व्यापक प्रयोग डिजिटल कंटेंट को ‘सुरक्षा’ के नाम पर नियंत्रित करने की नई राह खोल रहा है।
भविष्य की राह और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
ZEE5 ने पहले ही आईबी मंत्रालय के अंतरिम आदेश को मानते हुए फिल्म को हटाया था, और अब IDC ने इसे स्थायी रूप से प्रतिबंधित रखने की सिफ़ारिश की है। साथ ही, पैनल ने ऑनलाइन उपलब्ध पायरेटेड संस्करणों को हटाने की भी मांग की है। इस निर्णय पर सिनेमा प्रेमियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रकट किया है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा के पक्षधर इसे आवश्यक मानते हैं। इस विवाद से भारत में डिजिटल कंटेंट नियमन का दायरा और अधिक विस्तारित हो सकता है।