महाराष्ट्र विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया जिसमें रामटेक के प्राचीन राम मंदिर के ट्रस्ट के सदस्यों को ‘श्री राम के प्रति श्रद्धा’ घोषित करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम विपक्ष का विरोध झेल रहा है, जो इसे संविधानिक उल्लंघन के रूप में देख रहा है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • महाराष्ट्र में रामटेक मंदिर के ट्रस्ट के लिए ‘भक्ति घोषणा’ अनिवार्य
  • विपक्ष ने इसे असंवैधानिक कहा, सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल
  • आयोध्या ट्रस्ट की भर्ती प्रक्रिया से तुलना, राजनीतिक प्रभाव पर चर्चा

मुंबई – महाराष्ट्र विधानसभा ने शुक्रवार को एक विधेयक पारित किया जिससे राज्य के प्रमुख राम मंदिर, रामटेक, के ट्रस्ट के प्रबंधन में शामिल होने वाले सभी सदस्य को ‘श्री राम के प्रति श्रद्धा’ की लिखित घोषणा देनी होगी। यह कदम आयोध्या में चल रहे श्यामा जनमभूमि ट्रस्ट की भर्ती प्रक्रिया के बाद आया, जहाँ भी समान शर्तें चर्चा में रही थीं।

पृष्ठभूमि और विधेयक की मुख्य सामग्री

लगभग 50 किलोमीटर नागपुर से दूर स्थित रामटेक, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान राम के 14‑वर्षीय वनवास के दौरान उनका एक ठिकाना माना जाता है। हर साल राम नवमी और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। अब पारित विधेयक के अनुसार, ट्रस्ट की प्रबंधन समिति के किसी भी सदस्य को निर्धारित फॉर्म में यह प्रमाणित करना होगा कि वह ‘श्री राम के भक्त’ है। यह घोषणा न केवल एक औपचारिक शर्त होगी, बल्कि इसे ट्रस्ट के मानदंडों में कानूनी रूप से जोड़ दिया गया है।

आयोध्या से तुलना और राजनीतिक प्रतिक्रिया

आयोध्या में श्यामा जनमभूमि ट्रस्ट ने हाल ही में अपने प्रथम सीईओ के लिए ‘राम के प्रति श्रद्धा का भाव’ को प्राथमिक योग्यता के रूप में रखा था। हालांकि, आयोध्या में यह शर्त केवल एक मानदंड के तौर पर उल्लेखित थी, जबकि महाराष्ट्र में इसे विधायी रूप से अनिवार्य किया गया है। इस अंतर को विपक्ष ने संवैधानिक उल्लंघन का कारण बताया। राष्ट्रीय कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और राष्ट्रीय जनता पार्टी (स्पिल) के विधायक इस शर्त की वैधता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष की आपत्तियां और संभावित प्रभाव

एनसीपी (स्पिल) के विधायक जयंत पाटिल ने कहा, “कैसे कोई विशेष क्षेत्र के रामभक्त हो सकता है? क्या आप रामभक्तों को बाँट रहे हैं?” शिवसेना के प्रतिनिधि वरुण सरदेई ने घोषणा की सत्यापन विधि पर तर्क किया, “क्या सरकार के पास इस शपथपत्र की प्रामाणिकता जाँचने की कोई तंत्र है?” कांग्रेस के विधायक विजय वडेत्टीवार ने आयोध्या में धन की चोरी के मुद्दे को उठाते हुए कहा, “अगर आयोध्या में 1400 करोड़ की चोरी की रिपोर्ट है, तो यहाँ ट्रस्ट में राजनैतिक हस्तक्षेप क्यों?”

भविष्य की दिशा और प्रशासनिक उद्देश्यों

राज्य मंत्री अशिश जैसवाल, जिन्होंने यह विधेयक पेश किया, ने कहा कि यह कदम मंदिर के बढ़ते वित्तीय लेन‑देन और संपत्ति प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रस्ट के सदस्य को honorarium, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता मिलेगा। विपक्ष ने इस बात को भी उजागर किया कि विधेयक के तहत जॉन्सवैल स्वयं एक अतिरिक्त सदस्य बनेंगे, जिससे हितों के टकराव की संभावना पैदा हो सकती है।

जैसे ही यह विधेयक लागू होगा, यह देखना बाकी है कि क्या यह धार्मिक भावना को राजनीतिक उपकरण में बदल देगा या वास्तव में मंदिर के प्रशासन को बेहतर बनाएगा।