मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने करूर में अपने भाषण के दौरान तमिलनाडु सरकार द्वारा सीमा पुनर्विभाजन के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने केंद्रीय सरकार से आग्रह किया कि यह कदम दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व और केंद्र से मिलने वाले संसाधनों को कमजोर करेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु सरकार सीमा पुनर्विभाजन को दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए खतरा मानती है।
  • मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय सरकार से प्रस्ताव वापस लेने का आह्वान किया।
  • पुनर्विभाजन से दक्षिणी राज्यों के संसाधन और संसद में आवाज़ पर असर पड़ेगा।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत सीमा पुनर्विभाजन की प्रक्रिया को 2026 के संविधान संशोधन (131वें संशोधन) बिल के माध्यम से आगे बढ़ाने की योजना है। इस बिल के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर निर्वाचन सीमाएँ पुनः निर्धारित की जाएँगी, जिससे संसद में दक्षिणी राज्यों का हिस्सा घट सकता है। तमिलनाडु, जो पहले से ही 2024 में इस विषय पर औपचारिक विधानसभा निर्णय ले चुका है, ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है।

मुख्यमंत्री विजय का भावनात्मक भाषण

करूर में, जहाँ 2025 में एक भीड़भाड़ वाली घटना के बाद हजारों लोगों की मृत्यु हुई, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भावनात्मक रूप से संबोधन दिया। उन्होंने शोकाकुल परिवारों को सरकारी नौकरी के आदेश सौंपते हुए, सीमा पुनर्विभाजन के विरोध में अपनी दृढ़ स्थिति स्पष्ट की। “किसी को भी हमारी जगह से वंचित नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा, “हम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।”

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

विजय ने तर्क दिया कि पुनर्विभाजन दक्षिणी राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु, के संसद में प्रभाव को कम करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह कदम सांस्कृतिक, भाषाई और राज्य अधिकारों के क्षेत्र में उत्तर भारत के पक्ष में झुकाव पैदा करेगा। टीवीके (तमिलनाडु विजेता कज़हगम) ने 33% महिला आरक्षण के समर्थन के बावजूद, 131वें संशोधन बिल के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई, यह कहते हुए कि यह दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान पहुँचाएगा।

आर्थिक परिणाम और संसाधन आवंटन

विजय ने विशेष रूप से यह चिंता जताई कि पुनर्विभाजन से जनसंख्या आधारित योजनाओं के लिए उपलब्ध केंद्रीय निधियों में कटौती हो सकती है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी राज्यों को पहले से ही केंद्र से मिलने वाली फंडिंग में असमानता महसूस हो रही है और यह बदलाव और भी गंभीर बना देगा। उन्होंने केंद्रीय सरकार से मौजूदा संसाधन आवंटन व्यवस्था को बनाए रखने का आग्रह किया।

भविष्य की दिशा

विजय के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट हो गया है कि तमिलनाडु, चाहे वह किसी भी राजनीतिक गठबंधन के साथ हो, सीमा पुनर्विभाजन के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। वे केंद्रीय सरकार को स्पष्ट कर रहे हैं कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास पर तमिलनाडु का विरोध अपरिवर्तित रहेगा। इस दिशा में, राज्य सरकार ने पहले ही अपनी विधानसभा में पुनर्विभाजन के खिलाफ औपचारिक निर्णय लिया है, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील बन गया है।