विधानसभा विपक्षी आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर 30‑वर्ष की ठेके और बिड़ी टाउनशिप जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं को धकेलने का आरोप लगाया, जबकि राज्य बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि एएचआईएनडीए समुदायों के कल्याण में केवल बीजेपी ही सच्चा साथी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांग्रेस पर 30‑वर्ष के ठेके और बिड़ी टाउनशिप के लिए भ्रष्टाचार के आरोप
- बी.वाई. विजयेंद्र ने एएचआईएनडीए समुदायों के लिए बीजेपी की भूमिका को रेखांकित किया
- परियोजनाओं के दीर्घकालिक प्रभाव और किसानों की जमीन सुरक्षा पर चर्चा
मायसूर में आयोजित कयाक समितियों के एकत्रीकरण कार्यक्रम में राज्य बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विपक्षी नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की नीतियों को तीखा चुनौती दी। विपक्षी ने विशेष रूप से बेंगलुरु के ठोस कचरा प्रबंधन के 30‑वर्ष के अनुबंध और बिड़ी टाउनशिप परियोजना को उजागर किया, जिन्हें उन्होंने “संभव भ्रष्टाचार” और “कृषक जीवन को जोखिम में डालने” के रूप में वर्णित किया।
पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
कर्नाटक में कांग्रेस ने 2025 में सत्ता संभाली, लेकिन उनका कार्यकाल केवल डेढ़ वर्ष बचा था। इस छोटे समय में उन्होंने कई बहु-अरब रुपये के बड़े‑परिमाण वाले ठेके जारी किए, जिनकी अवधि 15‑30 वर्ष तय थी। यह रणनीति पिछले सरकारों में भी देखी गई है, परन्तु इस बार विपक्ष का तर्क है कि यह “भविष्य की योजना” के बजाय “पिछले चुनावों के लिए वोट‑बैंक को पॉलिश करने” की कोशिश है। इस प्रकार के अनुबंध अक्सर परियोजना की लागत, पारदर्शिता और स्थानीय हितों पर सवाल उठाते हैं।
बिड़ी टाउनशिप परियोजना की जटिलताएँ
आर. अशोक ने बताया कि बिड़ी टाउनशिप योजना के तहत लगभग 60,000 एकड़ कृषि भूमि को औद्योगिक और आवासीय उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित करने का इरादा है। उन्होंने कहा, “जब सरकार का कार्यकाल केवल डेढ़ वर्ष है, तो 15‑वर्ष की योजना को आगे धकेलना अस्वीकृत नहीं किया जा सकता।” इस परियोजना से हजारों छोटे किसानों को अपनी उपजाऊ भूमि से विस्थापित किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
बीजेपी का एएचआईएनडीए समुदायों के प्रति दावा
विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस ने एएचआईएनडीए नाम के तहत सत्ता प्राप्त की, पर वास्तविक समर्थन नहीं दिया। उन्होंने बीआर अम्बेडकर, महात्मा गांधी और डी. देवराज उर्स के नामों को कांग्रेस द्वारा “नीति‑रहित” बताया। इसके विपरीत, बीजेपी ने “कयाक” (श्रमिक) वर्गों के लिए सामाजिक न्याय और आर्थिक सहायता की पहल को उजागर किया। उन्होंने केंद्र सरकार में पिछड़े वर्गों के 27 मंत्रियों का उल्लेख किया, जिससे यह संकेत मिला कि वर्तमान राष्ट्रीय नेतृत्व एएचआईएनडीए के हितों को अधिक महत्व देता है।
आगे की संभावनाएँ और चुनावी प्रभाव
कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, दोनों पक्षों के बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। विपक्षी दलों का लक्ष्य कांग्रेस को भ्रष्टाचार के आरोपों से धूमिल करना और किसानों के समर्थन को जीतना है, जबकि बीजेपी अपना “पिछड़े वर्गों के लिए सच्चा साथी” का चित्र पेश कर रही है। यदि बिड़ी टाउनशिप जैसी परियोजनाएँ जारी रहती हैं, तो यह न केवल कृषि उत्पादन को प्रभावित करेगा, बल्कि सामाजिक असंतोष को भी बढ़ा सकता है, जिससे अगली चुनावी लड़ाई में नई गतिशीलता उत्पन्न होगी।