ऑडिशन रत्न भवन, विजयवाड़ा में कांग्रेस की डीपा दसमुंशी ने भाजपा‑आरएसएस को लाखों भक्तों के विश्वासघात का आरोप लगाते हुए राम मंदिर दान में वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में जाँच की मांग की
  • भाजपा और आरएसएस पर दान में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप
  • श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नवीनीकरण, फोरेंसिक ऑडिट और FIR की आवश्यकता

ऑडिशन रत्न भवन, विजयवाड़ा में कांग्रेस की एआईसीसी जनरल सेक्रेटरी दीपा दसमुंशी ने रविवार को मीडिया से मुलाकात करते हुए स्पष्ट किया कि वह भाजपा‑आरएसएस को “लाखों भक्तों के विश्वासघात” का आरोप लगा रही हैं। दसमुंशी ने कहा कि आयोध्या में निर्मित हो रहे राम मंदिर के लिए एकत्रित दान में ‘वित्तीय अनियमितताएँ’ चल रही हैं, जिनका पर्दाफाश अभी तक नहीं हुआ है।

दावे और माँगें

दसमुंशी ने तीन प्रमुख प्रश्न उठाए: (i) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अनियमितताओं की जिम्मेदारी कौन लेगा, (ii) पूर्व जनरल सेक्रेटरी चम्पत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को क्यों स्वीकार किया गया, जबकि पारदर्शिता का दावा किया जा रहा है, और (iii) केंद्र क्यों स्वतंत्र, सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी वाली जांच को नकार रहा है। इन सवालों के जवाब में कांग्रेस ने तुरंत FIR दर्ज करने, सभी संलिप्तों की गिरफ्तारी, ट्रस्ट का विघटन‑पुनर्गठन और दानों का फोरेंसिक ऑडिट करने की माँग की।

पृष्ठभूमि एवं इतिहास

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया गया था, जिसमें विभिन्न राजनैतिक और धार्मिक संगठनों का प्रतिनिधित्व है। तब से ट्रस्ट के वित्तीय लेन‑देन में कई बार ‘फर्जी रसीदें’, ‘खर्चे का अतिव्यय’ और ‘विशेष जाँच टीम के दायरे से बाहर’ खर्चों की खबरें सामने आई हैं। 2023 में ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे को लेकर विवाद बढ़ा, लेकिन फिर भी नई नियुक्तियों को जारी रखा गया। इस संदर्भ में दसमुंशी ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रस्ट के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि अब वही कार्यालय इस मुद्दे पर मौन बरत रहा है।

राजनीतिक प्रभाव

यह विवाद सिर्फ एक वित्तीय स्कैंडल नहीं, बल्कि भाजपा‑आरएसएस के धार्मिक‑राजनीतिक गठबंधन की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। यदि सुप्रीम कोर्ट‑निगरानी में जाँच शुरू होती है, तो यह केंद्र‑राज्य संबंधों, ट्रस्ट के प्रबंधन और भविष्य में मंदिर की निर्माण‑समय‑सारिणी पर गहरा असर डाल सकता है। विपक्षी दलों का दावा है कि यह मुद्दा ‘धर्म‑राजनीति’ के प्रयोग से जनता को भ्रमित करने की रणनीति से अलग है; यह वास्तविक सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का मामला है।

आगे का रास्ता

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई, सार्वजनिक जाँच और पारदर्शी लेखा‑जाँच की मांग को जारी रखेगी। इस बीच, भाजपा का बयान अभी तक आया नहीं है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को संसद में उठाते हुए सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिशें बढ़ेंगी।