नारोत्तम मिश्रा को भाजपा टिकट से वंचित करने के बाद उनके समर्थकों ने डेटिया में राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर 12 घंटे तक हड़ताल लगाई, जिससे पुलिस और अधिकारियों को चोटें आईं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नारोत्तम मिश्रा को भाजपा टिकट से वंचित करने के बाद उनके समर्थकों ने 12 घंटे तक हाईवे पर कब्जा किया।
  • पुलिस ने टियर्स गैस के साथ कार्रवाई की, जिससे कई अधिकारियों को चोटें आईं।
  • इस घटना से डेटिया की चुनावी स्थिति में अस्थिरता और भाजपा की छवि पर सवाल उठे।

डेटिया बाय-इलेक्शन के संदर्भ में, पूर्व मंत्री नारोत्तम मिश्रा को 30 जुलाई के विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट नहीं दिया गया, जिससे उनके समर्थकों में तीव्र असंतोष पैदा हुआ। इस निर्णय के तुरंत बाद, 3,000 से अधिक लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर 12‑घंटे की हड़ताल शुरू कर दी, जिससे क्षेत्रीय यातायात अवरुद्ध हो गया।

प्रदर्शनों का विस्तार

पुलिस अधिकारी स्वप्निल वankhede के अनुसार, विरोधियों ने सड़क पर पत्थर फेंके और पुलिस वाहन को नुकसान पहुँचाया। टियर्स गैस के इस्तेमाल से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, परंतु इससे कई पुलिस अधिकारियों और SP को चोटें आईं। घटना के दौरान, 6 पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं, जबकि 10 से अधिक नागरिकों को हल्की चोटें लगीं।

राजनीतिक असर और पक्षीय प्रतिक्रियाएँ

भाजपा ने अस्थायी रूप से अष्टुतोष तिवारी को डेटिया के उम्मीदवार के रूप में नामित किया, जिसे मिश्रा के समर्थकों ने अस्वीकार कर दिया। इस कदम से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा, और कुछ स्थानीय अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। विपक्षी कांग्रेस ने भी इस घटना को भाजपा की पार्टी प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह लगाने के लिए इस्तेमाल किया।

भविष्य की दिशा और चुनावी समयरेखा

इलेक्शन आयोग ने 30 जुलाई को वोट डालने और 3 अगस्त को परिणाम घोषित करने का समय तय किया है। इस बीच, डेटिया की स्थिति अभी भी अनिश्चित है, और पुलिस को आगे के किसी भी आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा। यदि यह घटना जारी रहती है, तो यह भाजपा के चुनावी रणनीति और उसकी छवि पर लंबी अवधि में असर डाल सकती है।