कर्नाटक सरकार ने 32 मोबाइल फॉरेंसिक लैब और 75 नई पुलिस वाहनों का अनावरण किया, जिससे अपराध स्थल पर तेज़ सबूत संग्रह संभव होगा। यह पहल राज्य में वैज्ञानिक जांच को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा कदम है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 32 मोबाइल फॉरेंसिक लैब का शुभारंभ
  • 75 नई पुलिस वाहनों की तैनाती
  • फ़ॉरेंसिक सेवाओं में तकनीकी एवं मानव संसाधन का विस्तार

बेंगलुरु के विधाना सौधा में 11 जुलाई, 2026 को कर्नाटक के मुख्य मंत्री डी.के. शिवाकुमार ने 32 मोबाइल फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) और 75 नई पुलिस जीपों का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम गृह, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और ई‑गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खरगे की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ, जिन्होंने वैज्ञानिक जांच की महत्वता पर प्रकाश डाला।

फ़ॉरेंसिक लैबों का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

इन मोबाइल लैबों को कर्नाटक पुलिस विभाग के अधीन संचालित किया जाएगा, जिससे वे अपराध स्थल पर तुरंत पहुंच कर DNA, बायो‑ट्रैसेस, डिजिटल साक्ष्य आदि का现场 संग्रह और संरक्षण कर सकें। इस पहल से न केवल जांच की गति बढ़ेगी, बल्कि साक्ष्य की अखंडता भी सुनिश्चित होगी।

नए पुलिस वाहनों का प्रभाव

75 नई जीपों की तैनाती से फ़ॉरेंसिक टीमों को तेज़ी से स्थल पर पहुँचने में सहायता मिलेगी। यह वाहन विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए तैयार किए गए हैं, जहाँ पारंपरिक पहुंच में बाधाएँ आती थीं।

राज्य‑व्यापी फ़ॉरेंसिक बुनियादी ढाँचा

खरगे ने बताया कि कर्नाटक में बेंगलुरु, मैसूरु, मंगलुरु, बेलगावि और कालाबुरगी में मौजूदा फ़ॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को उन्नत उपकरण, अत्याधुनिक तकनीक और कुशल कर्मियों से सशक्त किया जाएगा। निरंतर प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन और अनुसंधान को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक प्रमाणों का उपयोग बढ़ेगा।

भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार फ़ॉरेंसिक विज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल बनाकर स्थापित करने के लिए निरंतर निवेश करेगी। यह पहल सार्वजनिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने, अपराध दर घटाने और समय पर न्याय प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।