महाराष्ट्र सरकार ने पुण्याश्लोक अहिल्यदेवी होलकर योजना के तहत फसल ऋण माफी को ₹2 लाख तक बढ़ा दिया, जिससे 2019 की महात्मा ज्योतिराव पुखर शेतकरी कर्ममुक्ति योजना से लाभार्थियों को अधिक राहत मिली। यह निर्णय विपक्ष की आलोचना के बाद शर्तों में ढील के रूप में आया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पहली बार फसल ऋण माफी को ₹2 लाख तक बढ़ाया गया।
  • 2019 की महात्मा ज्योतिराव पुखर शेतकरी कर्ममुक्ति योजना के लाभार्थियों को अतिरिक्त राहत मिली।
  • संसदीय बहस और विपक्ष की आलोचना के बाद सरकार ने शर्तों में ढील दी।

महाराष्ट्र सरकार ने पुण्याश्लोक अहिल्यदेवी होलकर योजना के तहत फसल ऋण माफी को ₹2 लाख तक बढ़ा दिया, जिससे 2019 की महात्मा ज्योतिराव पुखर शेतकरी कर्ममुक्ति योजना से लाभार्थियों को अधिक राहत मिली। यह निर्णय विपक्ष की आलोचना के बाद शर्तों में ढील के रूप में आया।

पहले, 2019 की योजना के तहत फसल ऋण माफी 50 हज़ार रुपये तक सीमित थी, जब किसान 2022‑23 और 2024‑25 के बीच के ऋण को समय पर चुका देते थे। यह सीमा उन किसानों के लिए पर्याप्त नहीं थी, जिनके ऋण 2 लाख रुपये से अधिक थे।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस असमानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि 'सहायता को उन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।' इसके जवाब में, कृषि मंत्री दत्तात्रय भारने ने कहा कि सरकार शर्तों में बदलाव करने के लिए तैयार है।

इसके बाद, फडनविस के नेतृत्व में एक उप-समिति गठित की गई, जिसने पुण्याश्लोक योजना के पात्रता मानदंडों की समीक्षा की और 2 लाख रुपये तक की माफी की सिफारिश की। इस कदम ने 56 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने का दावा किया है, जिससे राज्य की कृषि सहायता कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऋण माफी पर निर्भरता किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक संकट से बचा नहीं सकती। स्थायी समाधान के लिए, सरकार को ऋण पुनर्गठन, ब्याज दरों में कमी और कृषि ऋण की उपलब्धता को बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।