मणिपुर के इम्पाल पश्चिम में कांतों साबाल में मेइती समुदाय के छह खाली घरों को जलाया गया। 600 से अधिक लोगों की भीड़ को सुरक्षा बलों ने फायरिंग और बैटन चार्ज से रोककर दंगे को टाला।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कांतों साबाल में छह खाली मेइती घरों पर आग लगाई गई
- लगभग 600 लोगों की भीड़ को फायरिंग और बैटन चार्ज से रोका गया
- दो गिरफ्तारियों के बाद स्थिति स्थिर, लेकिन सामुदायिक तनाव बना हुआ
शनिवार दोपहर 12:30 बजे, इम्पाल पश्चिम के कांतों साबाल क्षेत्र में, मेइती समुदाय के छह खाली घरों को आग से जला दिया गया। यह क्षेत्र लेइमाखों सेना कैंप के पास स्थित है और 2023 में शुरू हुई मेइती‑कुकी जातीय हिंसा के कारण लंबे समय से खाली पड़ा था।
पृष्ठभूमि और कारण
पिछले साल के मई में मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हिंसा ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को विस्थापित किया। आर्थिक नाकाबंदी, भूमि विवाद और हथियार नियंत्रण को लेकर तनाव जारी रहा। इस माह के अंत में, कांगपोक्पी जिले से आए एक बड़े समूह ने आर्थिक नाकाबंदी के विरोध में प्रदर्शन किया और कथित तौर पर इन खाली घरों को जलाया।
सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
मेइती गांवों के लोग तुरंत इन घरों की ओर मार्च करने लगे, जिससे तनाव बढ़ा। भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ने भीड़ को रोकने के लिए फायर गैस के शैलों और बैटन चार्ज का उपयोग किया। तीन स्थानीय लोगों को हल्की चोटें आईं, लेकिन कोई मौत नहीं हुई।
गिरफ्तारी और जांच
मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, आरएएफ और सेना की संयुक्त टीम ने दो व्यक्तियों—कम्मांग ल्होउवुम (65) और पगिन हैंगशिंग (30)—को गिरफ्तार किया। इनका संबंध लेइमाखों एरिया प्रोटेक्शन कमिटी और स्थानीय कुकी गांव से था। पुलिस ने मामला दर्ज कर व्यापक जांच जारी रखी है।
सामुदायिक एवं सामाजिक प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों पर घरों को बचाने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि बलों ने उन्हें आग देखे बिना रोक दिया। एपीएनबीए इमा लुप की सदस्य संगिता केइशाम और इमजि मीरा की अध्यक्ष सुजाता ने सरकार पर सभी समुदायों के लिए समान सुरक्षा सुनिश्चित करने की कड़ी निंदा की।
यह घटना मणिपुर में अभी भी बनी हुई नाजुक सामाजिक स्थिति को उजागर करती है, जहाँ मेइती‑कुकी संघर्ष ने क्षेत्रीय शांति को लगातार चुनौती दी है।