पूर्व मुख्यमंत्री चारणजीत चन्नी और उनके समर्थकों ने पंजाब कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए भूपेश बघेल से मिलकर अपनी राय प्रस्तुत की। बघेल ने पार्टी के शीर्ष स्तर पर किसी भी बदलाव को अस्वीकार कर दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- चन्नी कैंप ने भूपेश बघेल से मिलकर राज्य अध्यक्ष के नेतृत्व को चुनौती दी।
- बघेल ने पंजाब कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा कहा।
- यह संघर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच तेज़ हो रहा है।
पंजाब कांग्रेस में राज्य अध्यक्ष पद को लेकर गहरी टकराव की स्थिति बन गई है। शनिवार, 11 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री चारणजीत सिंह चन्नी और उनके निकटतम सहयोगियों ने पार्टी के राज्य प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बैठक की, जिसका उद्देश्य अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की अध्यक्षता को लेकर पार्टी के आधार पर राय एकत्र करना था।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
जुलाई 1 को कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर राजा वारिंग को पंजाब यूनिट का अध्यक्ष पुनः नियुक्त किया और चन्नी को अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में नामित किया। यह निर्णय कई वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष का कारण बना, विशेषकर चन्नी के समर्थकों में, जो खुद को अध्यक्ष पद से बाहर किए जाने पर निराश महसूस कर रहे थे।
बैठक के प्रमुख प्रतिभागी
बैठक में चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा, भारत भूषण आशु, त्रिप्त राजिंदर सिंह बजवा, और गुरप्रीत सिंह कंगर सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। बघेल भी दोपहर 12:15 बजे राणा गुरजीत सिंह के घर पहुंचे, जहाँ उन्होंने सभी उपस्थित नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलना शुरू किया।
मुख्य मुद्दे और बघेल का रुख
चन्नी के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राजा वारिंग के नेतृत्व को स्वीकार्य मानते हैं या नहीं, यह तय करना था। गुरप्रीत कंगर ने स्पष्ट किया कि यह चर्चा विशेष रूप से वारिंग की अध्यक्षता को लेकर है। बघेल ने पहले ही कहा था कि उच्च कमांड के निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा, “जब हाई कमांड ने निर्णय ले लिया है, तो उसे बदला नहीं जा सकता।”
भविष्य की संभावनाएँ
यह संघर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच उभरा है, जहाँ कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक एकता दिखानी होगी। यदि चन्नी कैंप की असंतुष्टि बनी रहती है, तो यह पार्टी की चुनावी रणनीति और वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है। वहीं बघेल का दृढ़ रुख यह संकेत देता है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का निर्णय अंतिम है और राज्य स्तर पर कोई पुनर्विचार नहीं होगा।
संपूर्ण स्थिति यह दर्शाती है कि पंजाब कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन बदल रहा है, और यह बदलाव पार्टी के भविष्य के दिशा-निर्देशों को आकार देगा।